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#NewsBytesExplainer: चीन-बांग्लादेश में तीस्ता नदी परियोजना को लेकर समझौता, भारत के लिए कितनी चिंता की बात?
तीस्ता नदी भारत से निकलकर बांग्लादेश में ब्रह्मपुत्र नदी में जाकर मिल जाती है

#NewsBytesExplainer: चीन-बांग्लादेश में तीस्ता नदी परियोजना को लेकर समझौता, भारत के लिए कितनी चिंता की बात?

लेखन आबिद खान
Jun 30, 2026
12:20 pm

क्या है खबर?

बांग्लादेश और चीन के बीच तीस्ता नदी के प्रबंधन में सहयोग मजबूत करने पर सहमति बनी है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के चीन दौरे के बीच दोनों देशों में इस पर समझौता हुआ है। रहमान ने कहा है कि तीस्ता बैराज मास्टर प्लान को किसी भी कीमत पर लागू किया जाएगा। तीस्ता नदी जल बंटवारे का मुद्दा भारत के लिए संवेदनशील है। आइए जानते हैं ये कितनी बड़ी चिंता की बात है।

तीस्ता नदी

सबसे पहले तीस्ता नदी के बारे में जानिए

तीस्ता नदी सिक्किम से निकलकर पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी से उत्तर-पूर्व के मैदानी इलाके में उतरती है। यहां से सीमा पार कर बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में जाती है। आगे चलकर यह ब्रह्मपुत्र नदी (जिसे बांग्लादेश में यमुना के नाम से जाना जाता है) में मिल जाती है। लगभग 414 किलोमीटर लंबी यह नदी दोनों देशों के लाखों लोगों के लिए जीवन रेखा है। यह सिंचाई, कृषि, मछली पालन और पेयजल के लिए अहम है।

परियोजना

क्या है तीस्ता नदी परियोजना?

चीन सालों से बांग्लादेश में तीस्ता नदी प्रबंधन और पुनर्स्थापन परियोजना में रुचि दिखा रहा है। इस परियोजना में नदी की खुदाई और जीर्णोद्धार, तटबंधों का निर्माण, बाढ़ नियंत्रण उपाय, सिंचाई अवसंरचना, नदी तट संरक्षण, किनारे के कुछ हिस्सों का भूमि सुधार और शहरी विकास जैसे कदम शामिल हैं। इसका उद्देश्य बांग्लादेश के उत्तरी जिलों में बाढ़ प्रबंधन को बेहतर बनाना, सिंचाई व्यवस्था में सुधार करना, मिट्टी के कटाव को कम करना और कृषि उत्पादकता को बढ़ावा देना है।

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चिकन नेक

चिकन नेक से केवल 100 किलोमीटर दूर है परियोजना

बांग्लादेश में लालमनिरहाट के पास तीस्ता नदी पर जो परियोजना शुरू होनी है, वो 'चिकन नेक' कहे जाने वाले सिलीगुड़ी कॉरिडोर से 100 किलोमीटर से भी कम दूरी पर है। 'चिकन नेक' करीब 60 किलोमीटर लंबी और केवल 22 किलोमीटर चौड़ी जमीनी पट्टी है, जो भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ती है। चूंकि पूर्वोत्तर से जुड़ने वाले लगभग सभी सड़क, रेल और पाइपलाइन मार्ग यहां से गुजरते हैं, इसलिए इसे रणनीतिक रूप से संवेदनशील माना जाता है।

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चिंता

भारत के लिए क्या है चिंता की बात?

ये परियोजना दक्षिण एशिया में चीनी उपस्थिति का विस्तार है। चीन पहले ही कई परियोजनाओं के जरिए पाकिस्तान, श्रीलंका, नेपाल और बांग्लादेश में भारी निवेश कर चुका है। भारत को आशंका है कि नागरिक उद्देश्यों के लिए बनाई गई ये योजनाएं भविष्य में आपात स्थितियों के दौरान रणनीतिक तौर पर इस्तेमाल की जा सकती हैं। ये बांग्लादेश की चीन के साथ बढ़ती नजदीकी का भी संकेत है, जो शेख हसीना के कार्यकाल में भारत के करीब था।

समझौता

तीस्ता नदी को लेकर भारत-बांग्लादेश के बीच क्या विवाद है?

बांग्लादेश तीस्ता नदी के पानी का आधा हिस्सा चाहता है, खासकर गर्मियों में जब नदी का बहाव कम हो जाता है। वहीं, भारत का प्रस्ताव है कि नदी का 37.5 प्रतिशत पानी बांग्लादेश, 42.5 प्रतिशत भारत और बाकी 20 प्रतिशत पर्यावरणीय प्रवाह के लिए रखा जाए। भारत ने पश्चिम बंगाल में सिंचाई के लिए नहरें भी बनाना चाहता है। बांग्लादेश का कहना है कि इससे उसके क्षेत्र में नदी का प्रवाह और कम हो जाएगा।

चीन

भारत की चिंताओं पर चीन का क्या कहना है?

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने पत्रकारों से बात करते हुए भारत की चिंताओं पर कहा, "मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि चीन और बांग्लादेश का सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है और इस पर किसी तीसरे देश का प्रभाव नहीं होना चाहिए।" चीन ने कहा कि तीस्ता परियोजना पर सहयोग का उद्देश्य लोगों के जीवन स्तर में सुधार करना और बांग्लादेश के आर्थिक विकास में सहयोग देना है।

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