#NewsBytesExplainer: ईरान युद्ध से केवल LPG की क्यों हुई कमी, पेट्रोल-डीजल पर क्यों नहीं हुआ असर?
क्या है खबर?
ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच चल रहे युद्ध का असर भारत की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ रहा है। सबसे ज्यादा प्रभावित LPG गैस की आपूर्ति हुई है। गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनें लगी हैं, रेस्तरां और ढाबे अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं और सिलेंडर के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। वहीं, पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति पर अभी तक कोई असर नहीं पड़ा है। आइए समझते हैं संकट से गैस आपूर्ति ही क्यों प्रभावित हुई है।
इस्तेमाल
जरूरत की 60 प्रतिशत LPG आयात करता है भारत
पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारत हर साल 3.3 करोड़ टन LPG इस्तेमाल करता है। इसमें से केवल 40 प्रतिशत देश मांग घरेलू उत्पादन से पूरी होती है, जबकि 60 प्रतिशत के आसपास सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आयात होती है। LPG को ले जाने वाले टैंकरों को भारत पहुंचने के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से होकर गुजरना पड़ता है, जिसे अभी ईरान ने बंद कर रखा है।
LPG
केवल LPG आपूर्ति क्यों हुई प्रभावित?
इसका सीधा से जवाब है कि भारत आने वाली LPG का करीब 90 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य से आता है। यानी होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से देश की करीब 60 प्रतिशत LPG आपूर्ति पर असर पड़ रहा है। सरकार ने भले ही घरेलू LPG उत्पादन में 30 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है, लेकिन कुल खपत के हिसाब से ये बढ़ोतरी वास्तव में केवल 10-12 प्रतिशत ही है। यानी LPG आपूर्ति का 42-44 प्रतिशत हिस्सा अभी भी उपलब्ध नहीं है।
कच्चा तेल
पेट्रोल-डीजल पर क्यों नहीं पड़ रहा है असर?
कच्चे तेल के मामले में होर्मुज जलडमरूमध्य पर भारत की निर्भरता लगभग 30 प्रतिशत है। इसी वजह से कच्चे तेल की आपूर्ति पर इतना असर नहीं पड़ा है। भारत के कच्चे तेल के आयात का 70 प्रतिशत हिस्सा होर्मुज के बाहर के स्रोतों से आता है। इसकी एक और बड़ी वजह कच्चे तेल के आयात में विविधता है। भारत करीब 40 देशों से कच्चा तेल आयात करता है। रूसी कच्चा तेल तो कुछ ही दिनों में भारत पहुंच जाता है।
रूस
अमेरिका की 'छूट' के बाद रूसी तेल खरीद 50 प्रतिशत बढ़ी
अमेरिका द्वारा 'अनुमति' देने के बाद भारत की रूसी तेल खरीद फरवरी के मुकाबले मार्च में 50 प्रतिशत बढ़ गई है। ब्लूमबर्ग के अनुसार, भारत ने हाल ही में 3 करोड़ बैरल रूसी कच्चा तेल खरीदा है। अमेरिका द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के चलते लाखों बैरल रूसी तेल अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में था। अब ये कुछ दिनों में भारत पहुंच रहा है। पेट्रोल-डीजल पर असर न पड़ने की एक वजह भारत के पास इनका LPG के मुकाबले ज्यादा भंडार भी है।
LPG भंडार
देश में LPG का भंडार भी कम
देश में कच्चे तेल के रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार हैं। भारत ने विशाखापत्तनम, मंगलौर और पादुर में भूमिगत चट्टानी गुफाओं में आपातकालीन स्थितियों के लिए कच्चा तेल स्टोर कर रखा है। वहीं, LPG के ऐसे भंडार नहीं है। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के अनुसार, मंगलौर और विशाखापत्तनम में LPG के भंडार हैं , लेकिन इनकी कुल क्षमता 1.4 लाख टन है, जो केवल 2 दिनों की खपत से भी कम है।
सिलेंडर
2010 में 10 करोड़ से बढ़कर अब 33 करोड़ हुए गैस कनेक्शन
सरकार की योजनाओं के बाद पिछले दशक में LPG सिलेंडरों की मांग में भारी वृद्धि हुई है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के चलते देशभर में LPG कनेक्शनों की संख्या 33 करोड़ से ज्यादा हो गई है। पेट्रोलियम योजना एवं विश्लेषण प्रकोष्ठ के आंकड़ों के अनुसार, ये संख्या 2010 में लगभग 10.6 करोड़ से बढ़कर 2014 में 14.5 करोड़ हो गई और फिर 2018 में 22.4 करोड़ से बढ़कर 2025 तक लगभग 33 करोड़ हो गई है।