#NewsBytesExplainer: मार्को रुबियो के दौरे से सुधरेंगे भारत-अमेरिका संबंध, क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
क्या है खबर?
अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो आज से भारत के दौरे पर हैं। वे सबसे पहले कोलकाता पहुंचे, जहां उन्होंने मदर टेरेसा को श्रद्धांजलि दी। इसके बाद दिल्ली में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। बतौर विदेश मंत्री रुबियो का ये पहला आधिकारिक भारत दौरा है। इस दौरान वे क्वाड शिखर सम्मेलन में भी हिस्सा लेंगे। हालिया समय में भारत-अमेरिका के रिश्तों में आए तनाव के बीच रुबियो के दौरे को अहम माना जा रहा है।
दौरा
सबसे पहले दौरे के बारे में जानिए
दौरे के दूसरे दिन यानी 24 मई को रुबिया अपने भारतीय समकक्ष एस जयशंकर के साथ हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। 25 मई को वे दिल्ली से आगरा जाएंगे। इसी दिन दोपहर में आगरा से जयपुर रवाना होंगे। 26 मई को जयपुर से दिल्ली आएंगे। यहां क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में शामिल होंगे। इसमें भारत के साथ ऑस्ट्रेलिया और जापान के विदेश मंत्री भी शामिल होने जा रहे हैं।
रिश्ते
क्या सुधरेंगे भारत-अमेरिका के रिश्ते?
पूर्व राजनयिक अचल मल्होत्रा ने CNBC से कहा, "इस यात्रा का सबसे पहला और मुख्य उद्देश्य भारत और अमेरिका के बीच संबंधों को सुधारना होगा। आज भारत-अमेरिका के बीच संबंध वैसे नहीं हैं जैसे ट्रंप के सत्ता संभालने के समय थे। पिछले 20-25 वर्षों में हमने मेहनत से इस रिश्ते को बनाया है।" वहीं, पूर्व राजनयिक संजीव यादव ने इस यात्रा को संबंधों को सुधारने के बजाय उन्हें नए सिरे से स्थापित करने का अवसर बताया।
ऊर्जा
ऊर्जा सुरक्षा सबसे बड़ा मुद्दा बनकर उभरा है
ईरान युद्ध के चलते रुबियो की यात्रा में ऊर्जा सुरक्षा का मुद्दा प्रमुख रहने की उम्मीद है। यात्रा से पहले रुबियो ने कहा था कि अमेरिका भारत को उतना तेल बेचने को तैयार है, जितना वह खरीदना चाहता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि वेनेजुएला की उपराष्ट्रपति डेल्सी रोड्रिगेज तेल आपूर्ति पर बातचीत के लिए अगले सप्ताह भारत आ सकती हैं। कुछ महीनों में भारत का वेनेजुएला से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ा है।
तेल आयात
तेल आयात को लेकर विशेषज्ञों का क्या मानना है?
ऊर्जा विशेषज्ञ नरेंद्र तनेजा ने कहा, "भारतीय रिफाइनर वेनेजुएला के कच्चे तेल से पहले से ही परिचित हैं। भारत तेल की राष्ट्रीयता नहीं, केवल आर्थिक पहलुओं पर ध्यान देता है। कंपनियां स्थिर ऊर्जा स्रोतों की तलाश कर रही हैं, क्योंकि खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति का लगभग आधा हिस्सा होर्मुज जलडमरूमध्य के कारण बाधित हो रहा है।" वहीं, यादव ने तर्क दिया कि अमेरिका भारत के लिए ऊर्जा का स्थिर और कम भू-राजनीतिक जोखिम वाला प्रदाता बनकर उभर सकता है।
रक्षा
रक्षा क्षेत्र में भी बढ़ सकता है सहयोग
भारत-अमेरिका के बीच रक्षा साझेदारी पिछले कुछ सालों में मजबूत हुई है। भारतीय सेना के पास अमेरिका के कई आधुनिक हथियार और उपकरण हैं। इनमें P-8 पोसाइडन विमान, MQ-9बी स्काईगार्डियन ड्रोन, M-777 हॉवित्जर तोप और C-17 ग्लोबमास्टर-3 विमान शामिल हैं। अब सैन्य उपकरणों के संयुक्त उत्पादन और नई तकनीकों पर काम को लेकर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में सहयोग पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।
तनाव
तनावपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं भारत-अमेरिका के रिश्ते
कुछ महीनों में भारत-अमेरिका के बीच कई मुद्दों पर विवाद रहा है। सबसे बड़ा मुद्दा टैरिफ और व्यापार का है। भारत उन देशों में से था, जिन पर अमेरिका ने सबसे ज्यादा टैरिफ लगाया था। इसके बाद दोनों देशों में व्यापार समझौते पर भी लंबी चर्चा के बावजूद सहमति नहीं बन सकी। इसके बाद H-1B वीजा और अमेरिका की पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकी जैसे मुद्दों ने भी द्विपक्षीय संबंधों पर असर डाला है।