कौन हैं राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा?
क्या है खबर?
भारतीय वायु सेना के पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। वे राम मंदिर के पहले स्थायी CEO होंगे। आज हुई ट्रस्ट की बैठक में उनके नाम का ऐलान किया गया। दान विवाद के बीच मिश्रा राम मंदिर में प्रशासन, सुरक्षा, वित्तीय प्रबंधन और श्रद्धालुओं के दर्शन की व्यवस्था देखेंगे। आइए मिश्रा के बारे में जानते हैं।
शुरुआती जीवन
कैसा रहा मिश्रा का शुरुआती जीवन?
मिश्रा उत्तर प्रदेश के देवरिया के भोपतपुरा गांव के रहने वाले हैं। वे एक मध्यम-वर्गीय परिवार से आते हैं और उनके पिता लेक्चरर थे।
उन्होंने खड़कवासला स्थित नेशनल डिफेंस एकेडमी (NDA), डुंडीगल स्थित एयर फोर्स एकेडमी, एयर फोर्स टेस्ट पायलट्स स्कूल, एयर कमांड एंड स्टाफ कॉलेज (अलबामा) और रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज (यूनाइटेड किंगडम) से पढ़ाई की है।
6 दिसंबर, 1986 को मिश्रा को वायु सेना में कमीशन मिला था।
वायुसेना
वायुसेना में किन अहम पदों पर रहे हैं मिश्रा?
मिश्रा ने वायुसेना में 39 साल सेवाएं दीं और इसी साल अप्रैल में सेवानिवृत्त हुए।
वे फाइटर स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, एयरक्राफ्ट एंड सिस्टम्स टेस्टिंग एस्टेब्लिशमेंट (ASTE) और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड के चीफ टेस्ट पायलट, 15 विंग (बरेली) और 18 विंग (पठानकोट) में एयर ऑफिसर कमांडिंग, ऑपरेशनल प्लानिंग एंड असेसमेंट ग्रुप में निदेशक, कमांडेंट, ASTE, डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ, डिप्टी चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ और एयर ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ, वेस्टर्न एयर कमांड जैसी अहम जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं।
युद्ध
करगिल युद्ध से लेकर 'ऑपरेशन सिंदूर' में अहम भूमिका
मिश्राके पास 3,000 घंटे की उड़ान का अनुभव है। इस दौरान उन्होंने 18 तरह के लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टरों को उड़ाया है।
'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान वे वायुसेना की पश्चिमी कमान की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
करगिल युद्ध के दौरान भी मिश्रा मिराज-2000 विमानों से लेजर निर्देशित बम संचालित करने वाली टीम का हिस्सा थे।
2010 में उन्होंने गरुड़ अभ्यान के दौरान भारतीय वायुसेना दल का नेतृत्व किया था।
सम्मान
मिश्रा को मिल चुके हैं ये खास सम्मान
मिश्रा को 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान उनकी भूमिका के लिए 2025 के स्वतंत्रता दिवस पर 'सर्वोत्तम युद्ध सेवा पदक' से नवाजा गया है। यह संघर्ष के दौरान बेहतरीन सेवा के लिए देश का सबसे बड़ा सम्मान है। बीते 46 सालों में सिर्फ 10 बार ही ये सम्मान दिया गया है।
इसके अलावा 2024 में उन्हें अति विशिष्ट सेवा पदक और 2013 में विशिष्ट सेवा पदक से भी सम्मानित किया गया था।
चयन
5,000 से ज्यादा लोगों में से हुए मिश्रा का चयन
राम मंदिर CEO पद के लिए 5,585 लोगों ने आवेदन किया था। इनमें से 16 लोगों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था।
इसके बाद समिति ने 3 लोगों के नाम श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास को सौंपे थे। इस दौरान आवेदनकर्ताओं से प्रशासनिक अनुभव, जिम्मेदारियों, धार्मिक क्षेत्र में काम और भगवान राम के प्रति आस्था से जुड़े सवाल पूछे गए थे।
कथित तौर पर ट्रस्ट ने कट्टर हिंदू और शाकाहारी होने जैसी कई शर्तें रखी थीं।