कौन हैं CBSE के नए प्रमुख IAS प्रशांत सीताराम लोखंडे? सामने होंगी ये बड़ी चुनौतियां
क्या है खबर?
एक के बाद एक लगातार कई विवादों में घिर रहे केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) को नया मुखिया मिल गया है। वरिष्ठ IAS अधिकारी प्रशांत सीताराम लोखंडे को CBSE का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी पत्र के अनुसार, कैबिनेट की नियुक्ति समिति ने उनके नाम को मंजूरी दे दी है। आइए जानते हैं CBSE के नए अध्यक्ष लोखंडे कौन हैं।
परिचय
कौन हैं लोखंडे?
लोखंडे अरुणाचल प्रदेश-गोवा-मिजोरम एवं केंद्रशासित प्रदेश (AGUMT) कैडर के 2001 बैच के IAS अधिकारी हैं। CBSE में तैनाती से ठीक पहले वे केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के महत्वपूर्ण पद पर सेवाएं दे रहे थे। उनकी गिनती बहुत ही अनुशासित और सख्त अधिकारियों में होती है। उनका जन्म नवंबर 1973 में हुआ था। उन्होंने पुणे विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है। उन्होंने NITIE मुंबई से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर डिप्लोमा भी किया है।
अनुभव
कितने अनुभवी हैं लोखंडे?
लोखंडे इससे पहले संयुक्त सचिव, निदेशक, उप सचिव, निजी सचिव, काउंसलर, डिप्टी कमिश्नर और सचिव जैसे कई महत्वपूर्ण पदों पर काम कर चुके हैं। वे बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास में वित्त एवं आर्थिक मामलों के सलाहकार रह चुके हैं। उन्हें उत्कृष्ट सेवा के लिए 2 बार स्टेट अवॉर्ड (गोल्ड) से सम्मानित किया जा चुका है। उन्हें सरकार की नीति मामलों का विशेषज्ञ भी माना जाता है। उन्हें हिंदी, मराठी और अंग्रेजी भाषा का ज्ञान है।
चुनौतियां
ऑन स्क्रिन मार्किंग को लेकर विवाद निपटाना बड़ी चुनौती
लोखंडे के सामने फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती CBSE के मौजूदा विवाद से निपटना होगा। ऑन स्क्रिन मार्किंग को लेकर CBSE सवालों के घेरे में है। इस प्रक्रिया से जुड़े टेंडर में भारी गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं। छात्रों के साथ-साथ विपक्ष भी इस मुद्दे पर हमलावर है। वहीं, CBSE का रिवैल्यूएशन पोर्टल भी गड़बड़ियों का शिकार हो रहा है। ऐसे में इन विवादों को प्राथमिकता से निपटाना बड़ी चुनौती है।
अन्य चुनौतियां
ये चुनौतियां भी सामने
लोखंडे की नियुक्ति ऐसे समय हुई है, जब CBSE नई शिक्षा नीति और 3 भाषाओं के क्रियान्वयन पर काम कर रहा है। 3 भाषा नीति का खासतौर पर दक्षिणी राज्यों में विरोध हो रहा है। वहीं, नई शिक्षा नीति के तहत नया सिलेबस और नया एग्जाम पैटर्न लागू करना भी बड़ी जिम्मेदारी होगी। इसके अलावा बोर्ड परीक्षाओं के दौरान हजारों केंद्रों पर पारदर्शिता और बिना किसी तकनीकी खराबी के परीक्षाओं का आयोजन करवाना भी अहम चुनौती है।