
बलात्कार मामले पर विवादित टिप्पणी करने वाले इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज राममनोहर मिश्रा कौन हैं?
क्या है खबर?
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस राम मनोहर नारायण मिश्रा अपनी एक टिप्पणी को लेकर चर्चाओं में है।
एक फैसले में उन्होंने कहा था कि स्तनों को छूना और पायजामे का नाड़ा तोड़ना बलात्कार या बलात्कार की कोशिश नहीं माना जा सकता है।
आज ही सुप्रीम कोर्ट ने जस्टिस मिश्रा के फैसले पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि ये टिप्पणियां पूरी तरह असंवेदनशील और अमानवीय नजरिया दिखाती हैं।
आइए जानते हैं जस्टिस मिश्रा कौन हैं।
परिचय
कौन हैं जस्टिस मिश्रा?
जस्टिस मिश्रा का जन्म 1964 में हुआ है। उन्होंने 1985 में कानून में स्नातक और 1987 में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की है। वे 1990 में उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में बतौर मुंसिफ शामिल हुए और 2005 में उन्हें उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नत किया गया।
कई साल वे बागपत और अलीगढ़ में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में काम कर चुके हैं और न्यायिक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (JTRI) के निदेशक भी रहे हैं।
हाई कोर्ट
अगस्त, 2022 से हाई कोर्ट में हैं जस्टिस मिश्रा
जस्टिस मिश्रा को 15 अगस्त, 2022 को अतिरिक्त न्यायाधीश के रूप में इलाहाबाद हाई कोर्ट में पदोन्नत किया गया था।
इसके बाद 25 सितंबर, 2023 को वह स्थायी जज बने। नवंबर, 2026 में वे सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
जस्टिस मिश्रा लखनऊ में जिला एवं सत्र न्यायाधीश के रूप में भी काम कर चुके हैं।
बलात्कार से जुड़े विवादित फैसले के बाद जस्टिस मिश्रा चर्चाओं में जरूरी आए हैं, लेकिन इससे पहले भी वे कई अहम फैसले सुना चुके हैं।
मामले
किन-किन अहम मामलों की कर चुके हैं सुनवाई?
जस्टिस मिश्रा मथुरा में शाही ईदगाह और श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद की सुनवाई कर रही पीठ का हिस्सा हैं।
बीते साल जस्टिस मिश्रा ने निचली अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की तुलना यूनानी दार्शनिक प्लेटो से की गई थी।
2023 में बलात्कार के एक मामले में उन्होंने कहा था कि बलात्कार की शिकार महिला कोई सह-अपराधी नहीं है, इसलिए उसकी गवाही की पुष्टि पर जोर देना एक महिला का अपमान है।
हालिया मामला
क्या है हालिया टिप्पणी का मामला?
उत्तर प्रदेश के कासगंज की एक महिला ने कोर्ट में शिकायत दी कि वह नवंबर, 2021 को अपनी नाबालिग बेटी के साथ रिश्तेदार के घर से लौट रही थी।
तभी गांव के 3 युवकों ने बाइक से घर छोड़ने की बात कही। महिला ने बेटी को साथ जाने दिया, लेकिन रास्ते में तीनों ने उसके साथ बलात्कार का प्रयास किया।
पहले ये मामला कासगंज की विशेष कोर्ट में पहुंचा, जिसे आरोपियों ने हाई कोर्ट में चुनौती दी।
कोर्ट
फैसला सुनाते हुए जस्टिस मिश्रा ने क्या कहा था?
जस्टिस मिश्रा की पीठ ने कहा था, "केवल यह तथ्य कि अभियुक्तों ने पीड़िता के स्तन को पकड़ा, पायजामे की डोरी तोड़ दी और पुलिया के नीचे खींचने का प्रयास किया, यह अपने आप में बलात्कार के प्रयास का मामला नहीं बनता है। अभियुक्तों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर ये सिद्ध करना संभव नहीं है कि उन्होंने बलात्कार करने की कोशिश की थी।"