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जस्टिस वर्मा को संसदीय समिति ने दोषी माना; क्या जेल भेजे जाएंगे, आगे क्या?
जस्टिस वर्मा को संसदीय समिति ने दोषी पाया है

जस्टिस वर्मा को संसदीय समिति ने दोषी माना; क्या जेल भेजे जाएंगे, आगे क्या?

लेखन आबिद खान
Aug 12, 2026
06:54 pm

क्या है खबर?

लोकसभा की 3 सदस्यीय जांच समिति ने दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा को नगदी कांड में दोषी पाया है। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि नकदी घोटाले में जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे सभी 3 आरोप सिद्ध हो गए हैं। जस्टिस वर्मा नकदी के स्रोत और मालिकाना हक जैसे अहम सवालों के संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। आइए समझते हैं इस मामले में आगे क्या हो सकता है।

दोषी

किन 3 आरोपों में दोषी पाए गए जस्टिस वर्मा?

जस्टिस वर्मा पर पहला आरोप था कि उनके घर में बेहिसाब नगदी मिली। समिति ने पाया कि नोट पूरे कमरे में फैले हुए थे।

दूसरा आरोप था कि कमरे में सबूतों से छेड़छाप की गई। इस संबंध में समिति ने पाया कि आग बुझाने के बाद स्टोर रूम सील नहीं किया गया और सुबह तक उसकी सफाई कर दी गई।

तीसरा आरोप जस्टिस वर्मा के भ्रामक जवाबों को लेकर था, जो भी सही पाया गया।

इस्तीफा

जस्टिस वर्मा इस्तीफा दे चुके, तो जांच का क्या मतलब?

मामले की जांच के बीच में ही इसी साल 9 अप्रैल को जस्टिस वर्मा ने इस्तीफा दे दिया था। अब सवाल उठता है कि फिर उन्हें दोषी पाए जाने का क्या असर होगा।

जानकारों का कहना है कि इससे संसदीय महाभियोग प्रक्रिया तकनीकी रूप से खत्म हो सकती है। ऐसी स्थिति में संसद में औपचारिक महाभियोग प्रक्रिया कानूनी रूप से खत्म हो जाती है।

हालांकि, यह फैसला निश्चित आधिकारिक अभियोग के रूप में काम करेगा।

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आपराधिक जांच

जस्टिस वर्मा से छीने जा सकते हैं सेवानिवृत्ति के बाद के विशेषाधिकार

दोषी पाए जाने के बाद जस्टिस वर्मा के खिलाफ आपराधिक जांच और मुकदमे का रास्ता खुल सकता है।

न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक, चूंकि समिति ने उन्हें गंभीर वित्तीय कदाचार और टालमटोल का दोषी पाया है, इसलिए सरकार जस्टिस वर्मा को सेवानिवृत्ति के बाद मिलने वाले विशेषाधिकार रोक सकती है या गंभीर प्रतिबंध लगा सकती है।

उनको मिलने वाली पेंशन, आधिकारिक आवास और ग्रेच्युटी पर रोक लगाई जा सकती है।

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मुकदमा

क्या करना पड़ेगा आपराधिक मुकदमे का सामना?

जांच रिपोर्ट में कहा गया है कि जस्टिस वर्मा के आवास से लाखों रुपये के बेहिसाब 500 रुपये के अधजले नोट बरामद हुए थे। माना जा रहा है कि इसके बाद नकदी के स्रोत, स्वामित्व और टैक्स चोरी जैसे पहलुओं पर जांच शुरू की जा सकती है।

केंद्रीय कानून प्रवर्तन एजेंसियां ​​भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत अज्ञात संपत्ति को लेकर आपराधिक मामले दर्ज कर सकती हैं। समिति ने आगे की कानूनी कार्रवाई की सिफारिश भी की है।

मामला

क्या है नगदी मिलने का मामला?

14 मार्च, 2025 को जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित सरकारी आवास में आग लग गई थी। आग बुझाने गए दमकलकर्मियों को स्टोर रूम से भारी मात्रा में अधजले नोट मिले थे। विवाद बढ़ने पर 22 मार्च को जस्टिस वर्मा को इलाहाबाद हाई कोर्ट भेज दिया गया।

पहले दिल्ली हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने जांच की, जिसमें वर्मा दोषी पाए गए।

इसके बाद सितंबर, 2025 में लोकसभा स्पीकर ने जांच समिति गठित की।

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