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पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा मामले की जांच रिपोर्ट संसद में पेश, 3 आरोप सही पाए गए
पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा मामले की जांच रिपोर्ट संसद में पेश

पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा मामले की जांच रिपोर्ट संसद में पेश, 3 आरोप सही पाए गए

लेखन गजेंद्र
Aug 12, 2026
04:01 pm

क्या है खबर?

दिल्ली स्थित सरकारी आवास में बेहिसाब नकदी मिलने के मामले में फंसे पूर्व न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ जांच करने वाली संसद की 3 सदस्यीय समिति की रिपोर्ट बुधवार को संसद में पेश की गई है। यह रिपोर्ट तब पेश की गई है, जब मानसून सत्र गुरुवार को समाप्त होने वाला है। इसे राज्यसभा और लोकसभा के महासचिवों ने दोनों सदनों में पेश किया है। रिपोर्ट में न्यायमूर्ति पर लगे 3 आरोप पूरी तरह सही पाए गए हैं।

रिपोर्ट

कौन से 3 आरोप मिले सही?

जांच समिति ने कहा कि न्यायाधीश नकदी की मौजूदगी, स्रोत और स्वामित्व के बारे में संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके, जिससे उनके खिलाफ पहला आरोप साबित हो गया।

समिति को लापता करेंसी नोटों के लिए संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं मिला और स्टोररूम को सील करने से पहले उसकी स्थिति में बदलाव किया गया था, जिससे पता चला कि सबूत सुरक्षित करने में विफलता मिली।

समिति ने न्यायाधीश के जवाबों को असंतोषजनक और टालमटोल भरा पाया, जिससे तीसरा आरोप भी सिद्ध हुआ।

रिपोर्ट

न्यायमूर्ति के साजिश के आरोपों को समिति ने नकारा

रिपोर्ट 2 खंडों में है, जिसमें उन मौखिक और दस्तावेजी साक्ष्यों को शामिल किया गया है, जो जांच के दौरान दर्ज किए गए हैं। समिति ने रिपोर्ट मई में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को सौंपी थी, जो आज पेश हुई।

रिपोर्ट में कहा गया कि इतनी बड़ी मात्रा में नकद का किसी नजर से बचना मुमकिन नहीं था, इसलिए इसमें साजिश की कोई गुंजाइश नहीं।

रिपोर्ट में कहा गया कि कार्यवाही के दौरान न्यायमूर्ति वर्मा ने साफ जवाब नहीं दिया।

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जांच

12 अगस्त 2025 को बनाई गई थी जांच समिति

न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव आने पर स्पीकर बिरला ने 12 अगस्त, 2025 को मामले में जांच के लिए समिति बनाई थी।

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति अरविंद कुमार की अध्यक्षता वाले इस पैनल में बॉम्बे हाई कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश चंद्रशेखर (अब सुप्रीम कोर्ट में) और बीवी आचार्य शामिल थे।

न्यायमूर्ति वर्मा सुप्रीम कोर्ट में समिति को चुनौती दे चुके हैं, लेकिन उनको निराशा हाथ लगी थी।

उन्होंने अप्रैल में इलाहाबाद हाई कोर्ट से इस्तीफा दे दिया था।

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मामला

क्या है नकदी मिलने का मामला?

दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायाधीश रहते न्यायमूर्ति वर्मा के सरकारी आवास के स्टोर रूम में 14 मार्च, 2025 को आग लगी थी। तब उनकी बेटी और वृद्ध मां ने अग्निशमन-पुलिस बुलाई।

आग बुझाने के बाद टीम को घर से भारी मात्रा में नकदी मिली। इसकी जानकारी तत्कालीन CJI संजीव खन्ना को हुई तो उन्होंने कॉलेजियम बैठक बुलाकर न्यायमूर्ति वर्मा का स्थानांतरण इलाहाबाद कोर्ट कर दिया।

इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति गठित की, जिसने न्यायमूर्ति वर्मा को दोषी ठहराया।

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