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#NewsBytesExplainer: समुद्री केबल काटने की तैयारी में ईरान, भारत पर क्या हो सकता है असर?
ईरान ने समुद्र में बिछी इंटरनेट केबलों को काटने की चेतावनी दी है

#NewsBytesExplainer: समुद्री केबल काटने की तैयारी में ईरान, भारत पर क्या हो सकता है असर?

लेखन आबिद खान
Oct 24, 2026
06:13 pm

क्या है खबर?

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का सीधा असर अब दुनियाभर में हो सकता है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका फिर से हमला करता है, तो वो खाड़ी देशों में समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों को काट देगा। इससे दुनियाभर में इंटरनेट धीमा हो सकता है और बैंकिंग, ऑनलाइन खरीदारी और क्लाउड सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। आइए जानते हैं ईरान के इस कदम का क्या असर हो सकता है।

रिपोर्ट

रिपोर्ट में दावा- केबलों को निशाना बनाने की योजना

ईरान के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि अगर अमेरिका फिर से हमला करता है तो तेहरान ने समुद्र में बिछी इंटरनेट केबलों को निशाना बनाने की योजना तैयार की है।

एक अधिकारी ने कहा, "तेहरान केबल की मरम्मत को रोकने की कोशिश करेगा, ताकि इंटरनेट और अन्य संचार सेवाओं में व्यवधान लंबे समय तक बना रहे। अगर हमला हुआ, तो समुद्र में बिछी केबलों से लेकर गुप्त सैन्य ठिकानों तक कोई सीमा रेखा नहीं बचेगी।"

केबलें

खाड़ी देशों से कौनसी अहम केबलें गुजरती हैं?

ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य से कई इंटरनेट केबलें गुजरती हैं।

इनमें एशिया-अफ्रीका-यूरोप 1 केबल शामिल है, जो दक्षिण-पूर्व एशिया को मिस्र के रास्ते यूरोप से जोड़ती है और संयुक्त अरब अमीरात (UAE), ओमान, कतर और सऊदी अरब तक जाती है।

इसके अलावा फाल्कन और गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल जैसी केबलें भी यहां से गुजरती हैं। ये केबलें यूरोप, एशिया और अफ्रीका को आपस में जोड़ने वाले इंटरनेट ट्रैफिक का सबसे बड़ा हिस्सा संभालती हैं।

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भारत

भारत पर क्या हो सकता है असर?

टेलीजियोग्राफी के अनुसार, फारस की खाड़ी में सक्रिय केबल AAE-1, FALCON, गल्फ ब्रिज इंटरनेशनल केबल सिस्टम और टाटा-TGN गल्फ हैं। ये लाइनें सीधे भारत के विदेशी डेटा कनेक्शनों को सपोर्ट करती हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत का लगभग एक-तिहाई पश्चिमी डेटा ट्रैफिक उन नेटवर्कों से होकर गुजरता है, जो होर्मुज या उसके करीब से जाते हैं।

SEA-ME-WE 4, I-ME-WE और FALCON जैसे सिस्टम इस क्षेत्र के जरिए भारत को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ते हैं।

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असर

दुनियाभर पर क्या होगा असर?

विश्लेषकों ने रॉयटर्स को बताया कि केबलों को नुकसान से इंटरनेट सेवाएं धीमी हो सकती हैं और वित्तीय लेनदेन, ई-कॉमर्स और क्लाउड कंप्यूटिंग में बाधा आ सकती है।

असर इस बात पर भी निर्भर करेगा कि ऑपरेटर ट्रैफिक को कैसे डायवर्ट करते हैं और अन्य कनेक्शनों में कितनी अतिरिक्त क्षमता है।

हालांकि, टेलीजियोग्राफी के रिसर्च डायरेक्टर एलन मौल्डिन के मुताबिक, होर्मुज से दुनिया की एक प्रतिशत से भी कम अंतरराष्ट्रीय इंटरनेट क्षमता गुजरती है। इसलिए व्यापक असर नहीं होगा।

मरम्मत

केबलों की मरम्मत क्यों है मुश्किल काम?

जानकारों के मुताबिक, केबल कटने पर एक मरम्मत जहाज को भेजा जाता है और उसे सुधारने में 3 दिन तक लग जाते हैं।

अमेरिकी नौसेना के नौसेना खुफिया कार्यालय के प्रमुख रियर एडमिरल माइक ब्रूक्स के मुताबिक, 2024 में केबलों की मरम्मत में औसतन 51 दिन लगे, क्योंकि समुद्री कार्य परमिट में लगने वाला समय, जहाजों की उपलब्धता और मौसम ने काम को प्रभावित किया।

युद्ध की स्थिति में ये काम और जटिल हो जाता है।

कानून

केबलों को नुकसान पहुंचाने को लेकर क्या कहता है कानून?

1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCOS) के तहत, किसी देश के ध्वज वाले जहाज या उसके अधिकार क्षेत्र में रहने वाले लोग जानबूझकर या लापरवाही से समुद्री केबल क्षतिग्रस्त करते हैं, तो ये एक दंडनीय अपराध होगा।

कानून के अनुच्छेद 58 के तहत, ये नियम हर देश के तट से 200 समुद्री मील तक फैले समुद्री क्षेत्र में लाग होगा।

इससे पहले साल 1884 में पेरिस में भी केबलों को लेकर एक समझौता हुआ था।

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