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#NewsBytesExplainer: क्या ग्रीन पटाखे आम पटाखों से कम प्रदूषण फैलाते हैं? 
दिल्ली में दिवाली के दौरान केवल ग्रीन पटाखों को ही फोड़ने की अनुमति है (फाइल तस्वीर)

#NewsBytesExplainer: क्या ग्रीन पटाखे आम पटाखों से कम प्रदूषण फैलाते हैं? 

लेखन आबिद खान
Nov 06, 2026
06:42 pm

क्या है खबर?

दिवाली से पहले दिल्ली में पटाखों और प्रदूषण को लेकर चर्चाएं फिर तेज हो गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिवाली पर दिल्ली-NCR में हरित पटाखों को फोड़ने की इजाजत दे दी है। कोर्ट ने इसके लिए समय सीमा भी तय की है, जिसके तहत पटाखे 7 और 8 नवंबर को सुबह 6 से 7 और रात 8 से 10 बजे के बीच फोड़े जा सकेंगे। आइए समझते हैं ग्रीन पटाखे कितना प्रदूषण फैलाते हैं।

ग्रीन पटाखे

सबसे पहले समझिए क्या होते हैं ग्रीन पटाखे?

ग्रीन पटाखे ऐसे पटाखे होते हैं, जो पारंपरिक पटाखों की तुलना में पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचाते हैं। इनमें एल्युमिनियम, पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर जैसे हानिकारक रसायन या तो बहुत कम मात्रा में होते हैं या बिल्कुल नहीं होते हैं।

राष्ट्रीय पर्यावरण अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (NEERI) ने ग्रीन पटाखों की खोज की है।

ग्रीन पटाखों को रासायनिक संरचना और निर्माण प्रक्रिया में बदलाव के माध्यम से इन उत्सर्जनों में से कुछ को कम करने के लिए डिजाइन किया गया है।

प्रदूषण

कितना कम प्रदूषण फैलाते हैं ग्रीन पटाखे?

NEERI के मानकों के अनुसार, एक ग्रीन पटाखे को उसी श्रेणी के पारंपरिक पटाखे के मुकाबले कम से कम 30 प्रतिशत कम प्रदूषित कण उत्पन्न करना चाहिए।

रिपोर्ट के मुताबिक, कम मात्रा में बेरियम साल्ट या नाइट्रेट और दूसरे ऑक्सीडाइजर वाले नए फॉर्मूलेशन से पारंपरिक पटाखों की तुलना में PM10 और PM2.5 के उत्सर्जन में 45 से 60 प्रतिशत तक कमी देखी गई है।

सामान्य पटाखों के हानिकारक तत्वों को ग्रीन पटाखों में कम खतरनाक तत्वों से बदला जाता है।

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प्रकार

कितनी तरह के होते हैं ग्रीन पटाखे?

NEERI ने ग्रीन पटाखों के 3 फार्मुलेशन तय किए हैं- SWAS, SAFAL और STAR।

SWAS श्रेणी में आने वाले पटाखे 'सेफ वाटर रिलीजर' होते हैं। इन पर पानी की छोटी पॉकेट बनी होती है।

जब ये पटाखे फूटते हैं तो यह पानी भाप बनकर रिलीज होता है और पटाखा फटने से पैदा हुए प्रदूषण को सोख लेता है। इसमें पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर भी नहीं होता है।

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SAFAL और STAR

क्या होते हैं SAFAL और STAR पटाखे?

SAFAL पटाखों में एल्युमिनियम का कम इस्तेमाल होता है। इसकी जगह इसमें मैग्निशियम मिलाया जाता है, जो ध्वनि प्रदूषण को कम कर देता है। इनमें जियोलाइट-आधारित सामग्रियों का उपयोग किया जाता है।

वहीं, STAR श्रेणी के पटाखे सेफ थर्माइट पटाखे होते हैं। इनमें पोटेशियम नाइट्रेट और सल्फर नहीं होता है, बल्कि आयरन ऑक्साइड का इस्तेमाल किया जाता है।

इससे प्रदूषक तत्व का उत्सर्जन कम हो जाता है और शोर भी कम होता है।

अंतर

पारंपरिक पटाखों से कितने अलग होते हैं ग्रीन पटाखे?

पारंपरिक पटाखे काले पाउडर, क्लोरेट्स और परक्लोरेट्स से बने होते हैं। सामान्य पटाखे 160 डेसीबल तक शोर करते हैं, वहीं ग्रीन पटाखों की आवाज 110 से 125 डेसीबल तक ही होती है।

यानी आम पटाखों के मुकाबले ग्रीन पटाखों से वायु और ध्वनि प्रदूषण दोनों कम होते हैं। ग्रीन पटाखे सिर्फ प्रमाणित विक्रेताओं के पास ही मिलते हैं। इन पर 'ग्रीन क्रैकर' लेबल, CSIR-NEERI का सर्टिफिकेट और QR कोड होता है।

पहचान

कैसे करें ग्रीन पटाखों की पहचान?

ग्रीन पटाखों का निर्माण CSIR-NEERI से हरित पटाखा प्रमाणपत्र और पेट्रोलियम एंड एक्सप्लोसिव्स सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन (PESO) से लाइसेंस प्राप्त निर्माता ही कर सकते हैं।

आप निर्माता के पंजीकरण, उत्पाद प्रमाणन और पैकेजिंग पर दी गई जानकारी के जरिए इनकी पहचान कर सकते हैं। साथ ही जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थानों से ही इनकी खरीदी करें।

इन पटाखों के डिब्बे पर QR कोड भी होता, जिसे स्कैन कर जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

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