#NewsBytesExplainer: भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगा सकता है अमेरिका, क्या होगा असर?
क्या है खबर?
अमेरिका की संसद ने भारत और चीन समेत 5 देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ से जुड़े विधेयक को पारित कर दिया है। ये टैरिफ रूसी कच्चे तेल की शीर्ष खरीदारों पर लगाया जा सकता है। अब विधेयक को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पास मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अगर ये विधेयक कानून बना तो ट्रंप को इन 5 देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा। आइए भारतीयों पर इसका असर समझते हैं।
विधेयक
सबसे पहले विधेयक के बारे में जानिए
इस विधेयक का नाम 'लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' है। विधेयक में रूस के कच्चे तेल के शीर्ष 5 खरीदारों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का प्रावधान है। इनमें चीन, भारत, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान शामिल हैं।
ऐसा नहीं है कि विधेयक के पारित होते ही भारत पर 100 प्रतिशत टैरिफ लग जाएगा। विधेयक अगर कानून बना तो अमेरिकी राष्ट्रपति को भारत पर टैरिफ लगाने का अधिकार मिल जाएगा।
प्रावधान
क्या हैं विधेयक के बड़े प्रावधान?
अगर यह विधेयक कानून बन जाता है तो 1996 का 'ईरान प्रतिबंध कानून' भी 2031 तक बढ़ जाएगा। इसके तहत उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी है, जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं।
विधेयक में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सहित रूसी नेताओं, अधिकारियों और वित्तीय संस्थानों पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है।
विधेयक में उन गुप्त जहाजों पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है, जो रूस को प्रतिबंधों से बचने में मदद करते हैं।
विशेषज्ञ
क्या कह रहे हैं विशेषज्ञ?
भारत पर असर इस बात पर निर्भर करेगा कि विधेयक कानून बनता है या नहीं और क्या राष्ट्रपति इसके तहत मिलने वाले अधिकारों का इस्तेमाल करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत-अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में अनिश्चितता बढ़ सकती है।
फॉर्च्यून इंडिया से बात करते हुए ICRA लिमिटेड की मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, "अमेरिका द्वारा उच्च टैरिफ लगाने और उससे जुड़ी अनिश्चितता का भारतीय विकास की संभावनाओं पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।"
पेट्रोल
क्या भारत में महंगा हो जाएगा पेट्रोल-डीजल?
जरूरी नहीं है। अगर भारतीय रिफाइनर रूसी तेल खरीदना बंद करते हैं, तो उनके पास मध्य-पूर्व, अफ्रीका और अमेरिका सहित दूसरे विकल्प हैं।
असल इसलिए भी कम होगा, क्योंकि पहले रूस भारत को 10 डॉलर प्रति बैरल की छूट देता था, जो अब घटकर 1-2 डॉलर प्रति बैरल रह गई है। यानी रूसी तेल की आपूर्ति बंद होने से कीमतों में उतना बदलाव नहीं आएगा, जितना ज्यादा छूट मिलने के समय होता।
दुनिया
क्या दुनियाभर में बढ़ेंगी तेल की कीमतें?
अगर प्रतिबंधों के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार से रूसी कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा गायब होता है, तो वैश्विक आपूर्ति कम हो सकती है। ऐसी स्थिति में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
ईरान युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य पहले से बंद है। अब हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंदेब के नजदीक के अहम द्वीपों पर भी कब्जा कर लिया है।
इन्हीं वैश्विक तनावों के चलते ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई है।
खरीदी
भारत रूस से कितना तेल खरीदता है?
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस भारत के कच्चे तेल के सबसे बड़े स्रोतों में से एक बन गया है, क्योंकि पश्चिमी प्रतिबंधों के चलते रूस ने भारत को कम कीमत पर तेल बेचा।
ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, भारत ने वित्त वर्ष 2026 में 40.8 अरब डॉलर मूल्य का रूसी कच्चा तेल खरीदा, जो उसके कुल कच्चे तेल आयात का 30.3 प्रतिशत है।
जुलाई 2026 तक भारत के आयातित कच्चे तेल में रूस की हिस्सेदारी 51 प्रतिशत थी।