सुप्रीम कोर्ट पूजा स्थलों पर महिलाओं से भेदभाव के सवालों पर कर रहा सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट एक बार फिर पूजा स्थलों पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव के गंभीर सवालों पर सुनवाई कर रहा है। इसमें सबरीमाला मंदिर का मामला सबसे ऊपर है। जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच यह परख रही है कि क्या कुछ मंदिरों में महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाने वाली पुरानी रीतियां वैध मानी जा सकती हैं, खासकर जब संविधान का अनुच्छेद 25 धर्म की आजादी की गारंटी देता है। इसी दौरान न्यायाधीशों ने महिला जननांग कटान (फीमेल जेनिटल म्यूटिलेशन) जैसी प्रथाओं पर भी बात की। जस्टिस अमनुल्लाह ने इसे 'सामान्य शारीरिक बनावट से पूरी तरह विपरीत' बताया, जबकि वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि यह नाबालिगों के लिए बेहद हानिकारक है।
कोर्ट 7 संवैधानिक सवालों की कर रहा सुनवाई
कोर्ट 7 अहम संवैधानिक सवालों पर सुनवाई कर रहा है। इनमें यह शामिल है कि धार्मिक आजादी से जुड़े कानूनों में 'नैतिकता' का क्या अर्थ है और इन प्रथाओं को कौन चुनौती दे सकता है- क्या कोई बाहरी व्यक्ति भी मामला दायर कर सकता है या सिर्फ उस धर्म से जुड़े लोग ही ऐसा कर सकते हैं? यह पूरी कवायद सालों से चली आ रही गरमागरम बहस के बाद सामने आई है। मौजूदा सुनवाई का मकसद आखिर में यह साफ़ करना है कि धार्मिक स्थलों पर बराबरी और परंपराओं के बीच भारत का क्या रुख है।