मणिपुर: राहत शिविरों में 31 मौतों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, सरकार से मांगा पाई-पाई का हिसाब!
कुकी-मैतेई संघर्षों के बाद बने मणिपुर के राहत शिविरों में 31 लोगों की असामान्य परिस्थितियों में मौत होने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दखल दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेंच ने राज्य सरकार से इन मौतों के पीछे के कारणों और चल रही जांच की स्थिति पर स्पष्टीकरण मांगा है। जजों ने यह बात भी उठाई कि अधिकतर मामलों में मृतकों के परिवारों को महज 30,000 रुपये का मुआवजा मिला है। यह रकम जातीय हिंसा के अन्य पीड़ितों को दिए जाने वाले मुआवजे से काफी कम है।
रिपोर्ट से खुलासा: मणिपुर के शिविरों में 43,000 लोग रह रहे हैं
सुप्रीम कोर्ट का यह कदम एक रिपोर्ट के बाद उठाया गया है। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि राज्य के राहत शिविरों में करीब 43,000 लोग रह रहे हैं। जिरिबाम और चुराचांदपुर जैसे इलाकों के शिविरों में मौतों की संख्या कुछ ज्यादा ही है। शुरुआत में राज्य सरकार ने इस बारे में जानकारी देने में आनाकानी की, लेकिन कोर्ट के दबाव के बाद उसने पूरा ब्योरा पेश किया। अब मणिपुर के मुख्य सचिव को निर्देश दिया गया है कि वे बताएं कि आगे और मौतें न हों, इसके लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं और जांच में तेजी कैसे लाई जाए। इसके अलावा, सभी पीड़ित परिवारों को सही तरीके से मदद मिल रही है या नहीं, इसकी भी समीक्षा करने को कहा गया है।