ट्रेल्स पास पर 10 दिन मौत से जंग, हिमस्खलन से जूझकर लौटे उत्तराखंड के 19 जांबाज
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उत्तराखंड के कुमाऊं क्षेत्र में स्थित 5,312 मीटर ऊंचे ट्रेल्स पास से नीचे उतरते हुए 19 लोगों के एक ट्रेकिंग दल को हिमस्खलन का सामना करना पड़ा। बर्फीले तूफानों, गहरी बर्फ और दुर्गम रास्तों से गुजरते हुए 10 दिन बिताने के बाद सभी सदस्य सुरक्षित लौट आए। किसी को शारीरिक चोट तो नहीं आई, लेकिन वे सब थोड़े सहमे हुए थे।
आज भी साहसिक यात्रियों को लुभाता है ऐतिहासिक ट्रेल्स पास
ट्रेल्स पास भारत के सबसे चुनौतीपूर्ण पर्वतारोहण मार्गों में से एक माना जाता है। यह अपनी अप्रत्याशित मौसम स्थितियों और जटिल तकनीकी चुनौतियों के लिए मशहूर है। इस दर्रे को सबसे पहले 1830 में कुमाऊं के तत्कालीन ब्रिटिश डिप्टी कमिश्नर जी डब्ल्यू ट्रेल ने पार किया था। आज भी यह साहसिक अभियानों के शौकीनों को अपनी ओर आकर्षित करता है। इस दल की सुरक्षित वापसी ने इस पास के लंबे इतिहास में एक और साहसिक अध्याय जोड़ दिया है।