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#NewsBytesExplainer: ईरान युद्ध का भारत के किन-किन उद्योगों पर हो रहा है असर?
ईरान युद्ध के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए समुद्री परिवहन ठप हो गया है

#NewsBytesExplainer: ईरान युद्ध का भारत के किन-किन उद्योगों पर हो रहा है असर?

लेखन आबिद खान
Mar 11, 2026
12:06 pm

क्या है खबर?

अमेरिका और इजरायल से युद्ध के बीच ईरान ने वैश्विक व्यापार के लिए अहम होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है। इससे कच्चे तेल और गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है। वहीं, अब भारतीय उद्योगों पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है। रसायन, वस्त्र, खनन और इस्पात निर्माण जैसे उद्योगों से जुड़ी कंपनियों पर दबाव बढ़ता जा रहा है। आइए जानते हैं कौनसे भारतीय उद्योग प्रभावित हो रहे हैं।

रसायन

रसायनों की कीमत 40 प्रतिशत तक बढ़ी

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, गैस की आपूर्ति कम होने से रसायन और कपड़ा कंपनियों को बढ़ती लागत का सामना करना पड़ रहा है। उद्योग प्रतिनिधियों ने बताया कि इससे उत्पादन में कमी, कच्चे माल की कम उपलब्धता और उपभोक्ताओं के लिए कीमतों में वृद्धि हुई है। वहीं, उत्पादन भी कम हो रहा है, क्योंकि जरूरत की कुल 40 प्रतिशत गैस ही मिल पा रही है। रसायनों और दूसरे कच्चे माल की कीमतों में 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

कपड़े

वस्त्र उद्योग भी हुआ प्रभावित

कपड़े के प्रसंस्करण में इस्तेमाल होने वाले रसायनों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है। इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए रसायन क्षेत्र के विशेषज्ञ अजय जोशी ने कहा, "पश्चिम एशिया संघर्ष ने वैश्विक रासायनिक बाजारों में संरचनात्मक मूल्य परिवर्तन को जन्म दिया है। एक हफ्ते में ही 73 वस्तुओं की कीमतों में भारी उछाल आया है। कुछ की कीमतों में तो 60 प्रतिशत से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई है।"

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उर्वरक

उर्वरक और खनन क्षेत्र पर भी पड़ा असर

गैस की कमी का असर उर्वरक क्षेत्र पर भी देखा जा रहा है। गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर्स जैसे कुछ निर्माताओं ने पहले ही उत्पादन में कटौती की घोषणा कर दी है। वहीं, ईंधन की बढ़ती कीमतों से खनन क्षेत्र भी प्रभावित हो रहा है, क्योंकि खनन कार्यों में इस्तेमाल होने वाले अधिकांश उपकरण से लेकर अयस्क परिवहन के लिए इस्तेमाल होने वाले वाहनों तक ईंधन पर निर्भर हैं। कंपनियों के लिए खनन उत्पादन और परिवहन की लागत बढ़ गई है।

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स्टील

स्टील प्लांट में उत्पादन बंद होने की खबरें

वैश्विक निवेश बैंक और ब्रोकरेज फर्म CLSA ने चेतावनी दी है कि युद्ध ने ऊर्जा से जुड़ी वस्तुओं और परिवहन लागतों को बढ़ा दिया है, जिससे मांग-आपूर्ति संतुलन बिगड़ गया है। CLSA ने कहा कि खासतौर पर एल्युमीनियम उत्पादन प्रभावित हो सकता है और 0.6 मिलियन टन उत्पादन करने वाले एक एल्युमीनियम संयंत्र ने पहले ही काम बंद कर दिया है। हालांकि, CLSA ने कहा कि वेदांता और टाटा स्टील सहित कुछ भारतीय उत्पादकों को फायदा भी हो सकता है।

आम

आम के निर्यात पर भी असर पड़ना तय

युद्ध के चलते भारत से आम निर्यात भी प्रभावित हो सकते हैं। न्यूज18 के अनुसार, अगर 15 मार्च तक स्थिति सामान्य नहीं हुई, तो भारत के आम निर्यात पर गंभीर असर पड़ सकता है। कुल आम निर्यात में महाराष्ट्र का योगदान 60-70 प्रतिशत है। रत्नागिरी, सिंधुदुर्ग और रायगढ़ जिलों से 20,000 से 25,000 मीट्रिक टन आम विदेशों में भेजा जाता है। खाड़ी देश कोंकण से आने वाले अल्फोंसो आम के सबसे बड़े उपभोक्ताओं में से हैं।

अन्य क्षेत्र

ये उद्योग भी हो रहे प्रभावित

उड़ानें रद्द होने और हवाई क्षेत्र के बंद होने के कारण भारत के रत्न और आभूषणों के निर्यात के साथ-साथ संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से कच्चे हीरों के आयात पर असर पड़ा है। ईंधन की कमी से प्रभावित होने वाले उद्योगों में सिरेमिक और टाइल उद्योग भी शामिल है, जहां कंपनियां उत्पादन कम करने की योजना बना रही हैं। वहीं, कई राज्यों में वाणिज्यिक गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से रेस्तरां संचालन पर भी असर पड़ा है।

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