सुप्रीम कोर्ट में महाभियोग की कार्यवाही के खिलाफ न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की याचिका खारिज
क्या है खबर?
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को घर में नकदी मिलने के मामले में फंसे न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने महाभियोग की कार्यवाही को चुनौती दी थी। इलाहाबाद हाई कोर्ट के न्यायाधीश वर्मा ने याचिका में लोकसभा अध्यक्ष द्वारा उनके महाभियोग के लिए न्यायाधीश (जांच) अधिनियम के तहत 3 सदस्यीय समिति गठित करने के फैसले को रद्द करने की मांग की थी। न्यायमूर्ति दीपांकर दत्ता और सतीशचंद्र शर्मा की पीठ ने याचिका रद्द की है।
चुनौती
यशवंत वर्मा ने क्या जताई थी आपत्ति?
बार एंड बेच के मुताबिक, वर्मा ने प्रक्रियात्मक आधार पर लोकसभा अध्यक्ष के फैसले को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि उनके महाभियोग के नोटिस लोकसभा-राज्यसभा दोनों में दिए गए, लेकिन लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राज्यसभा अध्यक्ष द्वारा प्रस्ताव स्वीकार किए जाने की प्रतीक्षा किए बिना एकतरफा जांच समिति का गठन कर दिया। उनके वकील ने तर्क दिया कि जब दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव उठाता है, तो लोकसभा और राज्यसभा अध्यक्ष के बीच संयुक्त परामर्श होता है।
जवाब
लोकसभा के महासचिव ने क्या दिया जवाब?
लोकसभा के महासचिव ने कोर्ट में जवाब दिया कि राज्यसभा ने महाभियोग प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया, जिसका अर्थ है कि यह प्रावधान लागू नहीं होगा। उन्होंने बताया कि राज्यसभा के उपसभापति ने जुलाई में तत्कालीन अध्यक्ष जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद 11 अगस्त, 2025 को महाभियोग प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। इसलिए, लोकसभा अध्यक्ष को महाभियोग प्रक्रिया को स्वतंत्र रूप से जारी रखने का पूरा अधिकार था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने न्यायाधीश की याचिका खारिज कर दी।
समिति
12 जनवरी को संसदीय समिति के सामने पेश हुए थे वर्मा
सुप्रीम कोर्ट ने पिछली सुनवाई में न्यायमूर्ति वर्मा को लोकसभा स्पीकर द्वारा गठित कमेटी के सामने पेश होने को कहा था, जिसके बाद न्यायाधीश 12 जनवरी को जांच में शामिल हुए थे। संसदीय समिति के सामने अपने जवाब में न्यायमूर्ति वर्मा ने कहा कि वे घटना स्थल पर नहीं थे और जब पुलिस घटनास्थल को सुरक्षित करने में नाकाम रही, तो उन्हें कैसे जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। उन्होंने दावा किया कि नकदी बरामदगी में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।