दिल्ली पर बाढ़ का महासंकट, एक तिहाई सिकुड़ गया यमुना का बाढ़ क्षेत्र
दिल्ली यूनिवर्सिटी और IISER भोपाल की एक ताजा रिसर्च बताती है कि दिल्ली पर बाढ़ का खतरा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गया है। पिछले 100 सालों में, शहर के बढ़ते दायरे और बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के कारण यमुना के बाढ़ क्षेत्र एक-तिहाई तक सिकुड़ गए हैं। नदी का मूल रास्ता ही अब 68 प्रतिशत तक संकरा हो गया है, जिससे भारी बारिश के पानी को संभाल पाने की उसकी क्षमता बहुत तेजी से घट गई है। नतीजतन, तूफानों के दौरान दिल्ली का सुरक्षित रह पाना अब और मुश्किल होता जा रहा है।
45 वर्ग किलोमीटर का बाढ़ क्षेत्र यमुना से अलग हुआ
साल 1912 से लेकर अब तक, तटबंधों के कारण करीब 45 वर्ग किलोमीटर का बाढ़ क्षेत्र यमुना नदी से अलग हो गया है। इसकी वजह से इन जगहों पर खेती-किसानी, रिहायशी इलाके और निर्माण कार्य तेजी से बढ़ गए हैं। ताजेवाला, वजीराबाद और ओखला जैसे बैराज, साथ ही हथिनीकुंड बैराज जो नदी के लगभग 90 प्रतिशत पानी को दूसरी तरफ मोड़ देता है, अब ऊपर से आने वाले लगभग पूरे पानी को रोक लेते हैं।
इसके कारण गर्मियों में नदी के कुछ हिस्से बिलकुल सूख जाते हैं। जुलाई 2023 में आई बाढ़ में पानी का स्तर 1978 की तुलना में भी ज्यादा हो गया था, जबकि उस वक्त नदी में पानी की मात्रा कम थी। शोधकर्ताओं की चेतावनी है कि अगर हम नदी के किनारों या उसके आसपास इसी तरह निर्माण करते रहेंगे, तो भविष्य में दिल्ली को और भी गंभीर बाढ़ का सामना करना पड़ सकता है।