प्रदर्शनकारी छात्रों पर नहीं होगी कार्रवाई, केंद्र सरकार बोली- हम वादे को लेकर गंभीर
क्या है खबर?
केंद्र सरकार ने कहा है कि वह पेपर लीक को लेकर विरोध प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं करने जा रही है। सरकार ने ये बात सुप्रीम कोर्ट को बताई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा, "प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR के साथ क्या किया जाए, इस पर कुछ गलतफहमी थी। मुझे यह कहने के निर्देश हैं कि सरकार छात्रों पर अपने वादे को लेकर गंभीर है।"
कोर्ट
CJI बोले- पुलिसकर्मी को बेवजह नहीं बचाया जाना चाहिए
मुख्य न्यायाधीश ने कहा, "जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वाले पुलिसकर्मी को बेवजह सुरक्षा नहीं मिलनी चाहिए। ऐसा भी नहीं होना चाहिए कि प्रदर्शन की आड़ में अपराधी को सुरक्षा मिल जाए।"
इसके बाद वकील वृंदा ग्रोवर ने कहा, "दिल्ली पुलिस का कोई आदेश नहीं है, जो पैलेट गन के इस्तेमाल की अनुमति देता हो। हम ये नहीं कह रहे कि पुलिस के पास सुरक्षा के लिए कुछ नहीं होना चाहिए। लेकिन पैलेट गन इस्तेमाल के लायक नहीं है।"
वकील
वकील ने पूछा- क्या रद्द होंगी FIR?
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान वकील वृंदा ग्रोवर ने जानना चाहा कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR क्या वापस ली जाएंगी या रद्द की जाएंगी।
उन्होंने कहा, "ये युवा लोग हैं जिनका पूरा जीवन उनके सामने है। यहां तक कि मुकदमे को रद्द करने के लिए भी हमारे पास बिहार, बंगाल, असम, उत्तर प्रदेश और दिल्ली में FIR दर्ज हैं। राज्यों के साथ इस मामले को सुलझाने के बाद हम इस कोर्ट में वापस आएंगे।"
पैलेट गन
वकील ने कहा- पैलेट गन चलाने का निर्देश किसने दिया
वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायणन ने कहा, "हमने उन पुलिसकर्मियों की पहचान कर ली है, जिन्होंने कार्रवाई की थी। हलफनामे में बताया जाना चाहिए कि RAF को निर्देश देने के लिए कौन जिम्मेदार था। पुलिस कमिश्नर और RAF निदेशक को निर्देश दिए जाए कि वे बताएं कि उन्होंने पैलेट गन और लाठीचार्ज की अनुमति कैसे दी। पुलिस को इस तरह से काम करने की इजाजत नहीं दी जा सकती। हलफनामे में इन सवालों के जवाब दिए जाने चाहिए।"
पिछली सुनवाई
पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?
पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने 18 साल से कम उम्र के उन प्रदर्शनकारियों को रिहा करने का आदेश दिया था, जिनके खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं था।
कोर्ट ने कहा था कि पुलिस कार्रवाई की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होगी और जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग करने वालों की जवाबदेही तय होगी। कोर्ट ने प्रदर्शन से जुड़े डिजिटल सबूत सुरक्षित रखने को कहा था।
कोर्ट ने पैलेट गन से घायलों को इलाज मुहैया कराने का आदेश दिया था।
याचिका
किन याचिकाओं पर हो रही है सुनवाई?
सुप्रीम कोर्ट केंद्रीय सूचना आयुक्त (CIC) रह चुके यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार सिंह और शेख इरशाद मंसूरी की याचिका पर सुनवाई कर रहा है।
सिंह और मंसूरी दिल्ली में 20 जुलाई को रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) द्वारा चलाई गई पैलेट गन में घायल हुए थे।
याचिकाकर्ता ने नागरिक सभाओं के दौरान भीड़ को तितर-बितर करने के लिए छर्रों वाले हथियार के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने के लिए निर्देश देने, पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा और इलाज की मांग की है।