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राम मंदिर विवाद: सांसद संजय सिंह ने SIT को सौंपे '11 सबूत', बोले- महाघोटाला हुआ
AAP सांसद संजय सिंह ने राम मंदिर दान और जमीन से जुड़ी गड़बड़ी को लेकर SIT प्रमुख से मुलाकात की

राम मंदिर विवाद: सांसद संजय सिंह ने SIT को सौंपे '11 सबूत', बोले- महाघोटाला हुआ

लेखन आबिद खान
Jun 25, 2026
02:54 pm

क्या है खबर?

अयोध्या के राम मंदिर में चंदे और दान में गड़बड़ी की जांच SIT कर रही है। आज आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद संजय सिंह SIT के सामने पेश हुए। उन्होंने राम मंदिर में जमीन घोटाले से जुड़े 11 दस्तावेज SIT को सौंपे। करीब 15 मिनट तक संजय ने SIT के प्रमुख विजय विश्वास पंत से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि अयोध्या में जमीन खरीद में बड़ा घोटाला हुआ है और इसके दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।

बयान

संजय बोले- अब तक FIR क्यों नहीं हुई?

संजय ने कहा, "एक-एक कर सब सामने आ रहा है। पैसे की बरामदगी हो चुकी है, चढ़ावे में चोरी के तमाम सबूत मिल चुके हैं। फिर भी अब तक कोई जेल क्यों नहीं गया? किसी की गिरफ्तारी क्यों नहीं हुई? कोई FIR अब तक क्यों दर्ज नहीं हुई? यह बेहद हैरान करने वाली बात है। भगवान श्रीराम के नाम पर अयोध्या में बड़ा घोटाला हुआ है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।"

जमीन

4 करोड़ की जमीन 8 करोड़ में खरीदी गई- संजय

संजय ने कहा, "कई जमीनों को पहले कम कीमत पर खरीदा गया और बाद में ट्रस्ट या उससे जुड़े लोगों को कई गुना अधिक कीमत पर बेचा गया। कुछ मामलों में जमीन खरीदने और बाद में ट्रस्ट को बेचने वाले लोगों के बीच एक ही गवाह थे। 4 करोड़ रुपये में खरीदी गई जमीन को कुछ दिनों बाद 8 करोड़ रुपये में खरीदा गया।" उन्होंने कहा कि SIT ने जांच का आश्वासन दिया है।

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सबूत

संजय ने सौंपे ये सबूत

हरीश-कुसुम पाठक से ट्रस्ट ने 4.97 करोड़ की जमीन 8 करोड़ में खरीदी। इसमें ट्रस्ट के सदस्य अनिल मिश्रा और तत्कालीन भाजपा मेयर ऋषि कुमार उपाध्याय गवाह हैं। 2021 में सुल्तान अंसारी और रवि मोहन तिवारी ने जो जमीन हरीश-कुसुम पाठक से खरीदी, उसे 5 मिनट बाद 18.5 करोड़ में ट्रस्ट को बेचा गया। इसमें भी अनिल और ऋषि गवाह थे। ऋषि के भतीजे ने दान में मिली जमीन को चंपत राये को एक करोड़ में बेच दी।

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SIT

SIT ने संजय को मिलने बुलाया था

यह पहली बार नहीं है, जब संजय ने राम मंदिर ट्रस्ट की जमीन खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। इससे पहले भी वे कई बार सार्वजनिक मंचों और प्रेस कॉन्फ्रेंस में ये मुद्दा उठा चुके हैं। इसके बाद SIT ने खुद संजय को संपर्क कर जांच में सहयोग के लिए बुलाया था। संजय ने कहा कि उनका उद्देश्य किसी राजनीतिक विवाद को बढ़ाना नहीं, बल्कि जांच एजेंसी को उपलब्ध तथ्यों के आधार पर निष्पक्ष जांच में सहयोग करना है।

विवाद

क्या है दान और जमीन से जुड़ा विवाद?

दरअसल, राम मंदिर को मिले चंदे और ट्रस्ट द्वारा जमीन खरीद की प्रक्रिया में गड़बड़ी के आरोप हैं। कथित तौर पर राम मंदिर को मिले चंदे में सेंध लगाई गई, हिसाब नहीं रखा गया, दान में मिले सोने-चांदी के आभूषण गायब हो गए और ट्रस्ट ने मनमाने ढंग से जमीन खरीदी। इस मामले में राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय समेत कई लोगों की भूमिका संदिग्ध है। SIT मामले की जांच कर रही है।

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