UGC नियमों के विरोध में क्या 1 फरवरी को भारत बंद रहेगा?
क्या है खबर?
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से शैक्षणिक परिसरों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए नियमों पर बवाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। नियमों के खिलाफ पूरे देश में प्रदर्शन जारी है। उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में कथित सवर्ण समाज के लोग सड़कों पर उतर आए हैं। करणी सेना समेत कई संगठनों ने 1 फरवरी को भारत बंद का ऐलान किया है।
उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश के कई शहरों में प्रदर्शन
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, कानपुर और प्रयागराज समेत कई शहरों में प्रदर्शन हुए। लखनऊ में छात्र पंचायत के बैनर तले छात्रों ने 'बटेंगे तो कटेंगे' और 'एक हैं तो सेफ हैं' जैसे नारे लगाए। इलाहाबाद विश्वविद्यालय परिसर के छात्र संघ भवन के सामने भी छात्रों ने नारेबाजी की। वाराणसी DM कार्यालय के बाहर भी करणी सेना के पोस्टर लहराए गए। वाराणसी में 500 से ज्यादा छात्रों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर नारेबाजी की और अपना विरोध जताया।
बंद
1 फरवरी को भारत बंद का आह्वान
मध्य प्रदेश के इंदौर में करणी सेना ने देवी अहिल्या विश्वविद्यालय में प्रदर्शन किया। करणी सेना ने कहा कि बंद के दौरान नियमों का विरोध कर रहे सांसदों से लिखित में आश्वासन लिया जाएगा। वहीं, राजस्थान के जोधपुर में भी करणी सेना और सवर्ण समाज के पदाधिकारियों ने भी 1 फरवरी को बंद का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि 36 बिरादरी और संगठन के लोगों ने बंद का समर्थन किया है।
बिहार
बिहार में राजनीति तेज
बिहार की राजधानी पटना में करणी सेना ने 'काला कानून वापस लो' के पोस्टरों के साथ प्रदर्शन किया। बक्सर में प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और UGC कानून वापस लेने की मांग की। बिहार में नए नियमों पर राजनीति भी तेज हो गई है। RJD नेता तेज प्रताप यादव ने इस कदम को ऐतिहासिक बताया है। वहीं, JDU विधायक चेतन आनंद ने कहा कि दोषी को सख्त सजा मिले, लेकिन निर्दोष को बचने का मौका मिलना चाहिए।
टाइमलाइन
नियमों को लेकर कब-क्या हुआ?
13 जनवरी को UGC ने नए नियम अधिसूचित किए, जिन्होंने जातिगत भेदभाव से निपटने के 2012 के नियमों की जगह ली। जानकारी सामने आते ही सामान्य वर्ग के छात्रों और सवर्ण संगठनों ने विरोध करना शुरू कर दिया। कई राज्यों में प्रदर्शन हुए। 27 जनवरी को मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया। अगले ही दिन यानी 28 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं पर सुनवाई की सहमति जताई। 29 जनवरी को कोर्ट ने नियमों को लागू करने पर रोक लगा दी।
नियम
नियमों को लेकर क्या है विवाद?
दरअसल, UGC ने सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों व अन्य उच्च शिक्षण संस्थाओं को जातिगत भेदभाव के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। नियमों के मुताबिक, हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी, जो SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतें सुनेगी। इसमें SC, ST, OBC, दिव्यांग और महिलाओं का होना जरूरी है। सवर्ण या सामान्य श्रेणी के छात्र इन नियमों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इनमें 'गैर-समावेशी' परिभाषा अपनाई गई है।