LOADING...
सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों को लागू करने पर लगाई रोक, कहा- ये अस्पष्ट
सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियम लागू करने पर रोक लगा दी है

सुप्रीम कोर्ट ने UGC के नए नियमों को लागू करने पर लगाई रोक, कहा- ये अस्पष्ट

लेखन आबिद खान
Jan 29, 2026
01:31 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की ओर से शैक्षणिक परिसरों में जातिगत भेदभाव रोकने के लिए बनाए गए नियमों को लागू करने पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने कहा कि इन नियमों में काफी कुछ स्पष्ट नहीं है, जिससे इनके दुरुपयोग की संभावना बढ़ जाती है। वहीं, याचिकाकर्ता ने नए नियमों की धारा 3(c) को चुनौती देते हुए कहा कि यह इस धारणा पर आधारित है कि भेदभाव सिर्फ सामान्य वर्ग के छात्र ही करते हैं।

नोटिस

कोर्ट ने केंद्र सरकार को जारी किया नोटिस

कोर्ट ने आदेश दिया कि नए नियम फिलहाल लागू नहीं किए जाएंगे। पीठ ने इस बात पर जोर दिया कि पीड़ितों को बिना किसी उपाय के नहीं छोड़ा जाना चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले पर अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। इसी दिन रोहित वेमुला और पायल ताडवी के परिजनों द्वारा दायर याचिकाओं को भी मामले के साथ शामिल कर संयुक्त सुनवाई होगी।

कोर्ट

कोर्ट ने क्या-क्या कहा?

कोर्ट ने शैक्षणिक संस्थानों के भीतर सामाजिक अलगाव को जन्म देने वाली किसी भी संरचना के खिलाफ चेतावनी दी। कोर्ट ने कहा, "भारत की एकता हमारे शैक्षणिक संस्थानों में परिलक्षित होनी चाहिए। परिसर सामाजिक एकीकरण के लक्ष्य से अलग होकर काम नहीं कर सकते।" कोर्ट ने ये भी सुझाव दिया कि केंद्र सरकार चिंताओं की जांच के लिए विशेषज्ञों और विद्वानों की एक समिति गठित करने पर विचार कर सकती है।

Advertisement

टिप्पणियां

कोर्ट की अहम टिप्पणियां

मामले की सुनवाई CJI सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की पीठ ने की। पीठ ने कहा- हमने जातिविहीन समाज की दिशा में कितना कुछ हासिल किया है, क्या अब हम उल्टी दिशा में चल रहे हैं? नियम 4-5 ऐसे महत्वपूर्ण प्रश्न उठाते हैं, जो व्यापक मुद्दों से संबंधित हैं और समाज में विभाजन पैदा कर सकते हैं। प्रावधानों की भाषा स्पष्ट नहीं है, जिससे उनकी व्याख्या और इस्तेमाल को लेकर चिंताएं उत्पन्न होती हैं।

Advertisement

दलील

याचिकाकर्ताओं ने क्या-क्या दलील दी?

धारा 3(c) जातिगत भेदभाव को केवल SC, ST, OBC के खिलाफ किए गए भेदभाव के रूप में परिभाषित करता है, सामान्य श्रेणी के लोग इसमें शामिल नहीं हैं। कोई भी कानून पूर्वधारणा नहीं बना सकता कि भेदभाव सिर्फ एक ही वर्ग द्वारा किया जाता है। इससे समाज में वैमनस्य बढ़ने का खतरा है। नए नियम संविधान में दिए गए समानता के सिद्धांत का उल्लंघन करते हैं। संविधान का अनुच्छेद 14 वर्ग-आधारित विधान को प्रतिबंधित करता है।

मामला

क्या हैं नए नियम और विरोध की वजह?

दरअसल, UGC ने सभी विश्वविद्यालयों, कॉलेजों व अन्य उच्च शिक्षण संस्थाओं को रैगिंग के खिलाफ सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए हैं। नियमों के मुताबिक, हर विश्वविद्यालय और कॉलेज में एक इक्विटी कमेटी बनानी होगी, जो SC, ST और OBC छात्रों की शिकायतें सुनेगी। इसमें SC, ST, OBC, दिव्यांग और महिलाओं का होना जरूरी है। सवर्ण या सामान्य श्रेणी के छात्र इन नियमों का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि इनमें 'गैर-समावेशी' परिभाषा अपनाई गई है।

Advertisement