राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का राष्ट्र के नाम संबोधन, कहा- संविधान हमारे गणराज्य का आधार-ग्रंथ
क्या है खबर?
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने राष्ट्र को संबोधित किया है। उन्होंने देशवासियों को गणतंत्र दिवस की बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये वर्तमान, भूत और भविष्य में देश की दशा और दिशा का अवलोकन करने का अवसर है। उन्होंने कहा, "हमारा संविधान विश्व इतिहास में आज तक के सबसे बड़े गणराज्य का आधार ग्रंथ है। संविधान में निहित न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुत्व के आदर्श हमारे गणतंत्र को परिभाषित करते हैं।"
महिला
राष्ट्रपति ने कहा- नारी शक्ति का विकास में अहम योगदान
राष्ट्रपति ने कहा, "आज देश की बहन-बेटियां रूढ़ियों को तोड़कर देश के विकास में सक्रिय योगदान दे रही हैं। विकसित भारत के निर्माण में नारी-शक्ति की भूमिका महत्वपूर्ण रहेगी। उनके बढ़ते हुए योगदान से हमारा देश महिला-पुरुष समानता पर आधारित समावेशी गणतंत्र का उदाहरण प्रस्तुत करेगा। उनके स्वास्थ्य, शिक्षा, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए किए जा रहे राष्ट्रीय प्रयासों से अनेक क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। नारी शक्ति अधिनियम से देश की महिलाएं और सशक्त होंगी।"
अहम बातें
राष्ट्रपति के संबोधन की बड़ी बातें
वंदे मातरम के 150 साल पूरे होने पर उन्होंने कहा, "राष्ट्रवादी कवि सुब्रमण्य भारती ने अपनी तमिल रचना 'वंदे मातरम येनबोम' के जरिए वंदे मातरम को लोकप्रिय बनाया, जिसका बाद में कई भारतीय भाषाओं और श्री अरबिंदो द्वारा अंग्रेजी में अनुवाद किया गया। देश ने हाल ही में नेताजी सुभाष चंद्र बोस को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि दी, ताकि युवाओं को उनकी देशभक्ति की स्थायी भावना से प्रेरित किया जा सके।
संबोधन
राष्ट्रपति ने राष्ट्र निर्माण में हर क्षेत्र के योगदान की सराहना की
राष्ट्रपति ने कहा, "आप सब हमारे जीवंत गणतंत्र को शक्तिशाली बना रहे हैं। हमारे तीनों सेना के जवान मातृभूमि की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। पुलिस जवान और केंद्रीय बलों के जवान आंतरिक सुरक्षा के लिए तत्पर रहते हैं। किसान देशवासियों के लिए फसल पैदा करते हैं। कर्मठ और प्रतिभाशाली महिलाएं नए कीर्तिमान स्थापित रही हैं। डॉक्टर देशवासियों के स्वास्थ्य की देखभाल करते हैं। प्रबुद्ध शिक्षक भावी पीढ़ियों का निर्माण करते हैं।"
अर्थव्यवस्था
देश जल्द तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा- राष्ट्रपति
राष्ट्रपति ने कहा, "भारत विश्व की सबसे तेज गति से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था है। विश्व पटल पर अनिश्चितता के बावजूद भारत में निरंतर आर्थिक विकास हो रहा है। हम निकट भविष्य में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।" उन्होंने युवाओं से अपील करते हुए कहा, "हमारे देश की दशा बदली है। भारत स्वाधीन हुआ है। हम अपनी राष्ट्रीय नियति के निर्माता बने।"