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अहमदाबाद विमान हादसे का एक साल: उड़ान से दुर्घटनाग्रस्त होने तक आखिरी 32 सेकंड की कहानी
अहमदाबाद विमान हादसे को आज एक साल हो गया है

अहमदाबाद विमान हादसे का एक साल: उड़ान से दुर्घटनाग्रस्त होने तक आखिरी 32 सेकंड की कहानी

लेखन आबिद खान
Jun 12, 2026
11:30 am

क्या है खबर?

गुजरात के अहमबादाबाद में हुए एयर इंडिया विमान हादसे को आज एक साल हो गया है। लंदन जा रहा विमान AI-171 उड़ान भरने के 32 सेकंड के भीतर ही पास स्थित BJ मेडिकल कॉलेज कैंपस में गिर गया था। इस हादसे में 260 लोगों की मौत हो गई थी और यह भारतीय एविएशन इतिहास के सबसे उलझे हुए रहस्यों में से एक बन गया। आइए विमान के आखिरी पलों की कहानी जानते हैं।

शुरुआत

विमान में 242 यात्री थे सवार

12 जून, 2025 को अहमदाबाद हवाई अड्डे पर यात्रियों ने एयर इंडिया के विमान AI-171 में सवार होने के लिए चेक-इन किया। बोइंग 787 ड्रीमलाइनर ये विमान लंदन जा रहा था। इसमें कुल 242 लोग सवार हुए, जिनमें छात्र, विदेश यात्रा करने वाले प्रोफेशनल, गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपानी और कुछ विदेशी नागरिक भी शामिल थे। विमान ने रनवे पर तेजी पकड़ी और कुछ ही सेकंड में आसमान में पहुंच गया। अब तक सब कुछ सामान्य था।

स्विच

3 सेकंड बाद बंद हो गए इंधन स्विच

फ्लाइट रिकॉर्डर के डेटा के अनुसार, उड़ान भरने के 3 सेकंड बाद विमान के दोनों ईंधन नियंत्रण स्विच 'कटऑफ' पर चले गए। यानी बंद हो गए। दोनों स्विच के बंद होने में केवल 0.1 सेकंड का अंतर था। ये स्विच इंजन तक ईंधन के बहाव को कंट्रोल करते हैं। इनके बंद होने से इंजन में ईंधन की सप्लाई रुक गई और इंजन ने थ्रस्ट पैदा करना बंद कर दिया। यहीं से गड़बड़ी की शुरुआत हुई।

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पायलट

एक पायलट ने दूसरे से पूछा- स्विच क्यों बंद किया?

AAIB की शुरुआती रिपोर्ट के मुताबिक, एक पायलट ने दूसरे से पूछा कि उसने ईंधन स्विच क्यों बंद किया। दूसरे पायलट ने जवाब दिया कि उसने ऐसा नहीं किया। रिपोर्ट में ये नहीं बताया गया कि किस पायलट ने किससे ये पूछा था। इस रिकॉर्डिंग ने जांच की दिशा ही बदल दी। अब जांच विमान में तकनीकी खराबी के बजाय पायलटों की गलती की ओर मुड़ गई। कई पायलट समूहों ने इसका विरोध भी किया।

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स्विच

पायलट ने दोबारा चालू किए स्विच

फ्लाइट रिकॉर्डर डेटा से पता चला कि फ्यूल स्विच बंद होने के 10 से 14 सेकंड के अंदर पायलट ने दोनों स्विच को फिर से चालू कर दिया था। ये दिखाता है कि पायलटों ने आखिर तक विमान को बचाए रखने की कोशिश की। इसके बाद एक इंजन के दोबारा चालू होने के संकेत मिले। दूसरा इंजन भी शुरू हो रहा था। कुछ देर के लिए संकेत मिले कि विमान संभलने लगा था।

अंतिम पल

हादसे से ठीक पहले केवल 625 फीट ऊपर था विमान

इस समय तक विमान जमीन से सिर्फ 625 फीट ऊपर था। ऐसे में पायलट के पास समस्या का पता लगाने, इंजन रीस्टार्ट करने और पूरी तरह से भरे हुए जहाज को संभालने के लिए बहुत कम समय बचा था। विमान की ऊंचाई, गति और समय तीनों कम हो रहे थे। दरअसल, आधुनिक विमानों के इंजन तुरंत चालू नहीं होते। रीस्टार्ट करने की प्रक्रिया में कुछ सेकंड का वक्त लगता है।

दुर्घटना

इमारतों-दीवारों को चीरता हुआ जमीन पर गिरा विमान

आखिरी पलों मे विमान हवाई अड्डे की सीमा से बाहर मेडिकल कॉलेज कैंपस की ओर बढ़ने लगा। सबसे पहले आर्मी मेडिकल कॉर्प्स कंपाउंड के अंदर पेड़ों और कचरा जलाने वाली चिमनी से टकराया। दाहिना इंजन एक कांक्रीट की टंकी टकराया और विमान से अलग हो गया। विमान इमारतों और दीवारों को चीरता हुआ जमीन पर जा गिरा। इसके बाद इमारतों में आग लग गई। विमान के अंदर सवार केवल एक यात्री बचा। जमीन पर 19 लोग मारे गए।

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