NEET लीक पर दिल्ली में 'डिजिटल बंदी', क्या सरकार दबा रही विरोध की आवाज?
मंगलवार को 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) ने जंतर-मंतर पर 'चलो संसद' मार्च निकाला। इस दौरान मध्य दिल्ली के कुछ इलाकों में मोबाइल इंटरनेट सेवा रोक दी गई। संसद के मानसून सत्र के बीच हुए इस प्रदर्शन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही थी। वजह थी बार-बार NEET परीक्षा के पेपर लीक होना।
बताया जा रहा है कि सिग्नल जैमर लगाकर इंटरनेट बंद किया गया था। इसकी वजह से लोग उस इलाके में नेविगेशन का इस्तेमाल नहीं कर पा रहे थे और न ही वीडियो शेयर कर पा रहे थे।
अधिकार समूहों ने कहा - अनुच्छेद 19(1)(a) का उल्लंघन
IFF और SFLC इंडिया जैसे डिजिटल अधिकार समूहों ने इंटरनेट बंद करने को अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने के अधिकार पर हमला बताया। उन्होंने कहा कि यह संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) के खिलाफ है।
आलोचकों ने यह भी सवाल उठाया कि ऐसे इंटरनेट बंद करने के आदेश सिर्फ खास मौकों पर और तय नियमों के तहत ही दिए जाने चाहिए। लेकिन यहां उन नियमों का ठीक से पालन होता नहीं दिखा।
पिछले साल भारत दुनिया में सबसे ज्यादा बार इंटरनेट बंद करने वाले देशों में सबसे ऊपर रहा। ऐसे में सरकार की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ती जा रही हैं।