बांग्लादेश निर्वासित की गई गर्भवती सुनाली खातून को फिर भारत लाए जाने का मामला क्या है?
क्या है खबर?
पश्चिम बंगाल के बीरभूम की रहने वाली 26 साल की सुनाली खातून और उनके 8 साल के बेटे साबिर को बांग्लादेश से दोबारा भारत लाया गया है। सुनाली को लगभग 5 महीने पहले अवैध प्रवासी बताकर परिवार के अन्य सदस्यों के साथ भारत से बांग्लादेश निर्वासित कर दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद गर्भवती सुनाली को मालदा सीमा से भारत लाया गया है। आइए पूरा मामला समझते हैं।
परिचय
कौन है सुनाली खातून?
सुनाली और उनका परिवार पश्चिम बंगाल के बीरभूम के पैकर गांव का रहने वाला है। यह प्रवासी परिवार करीब 20 साल से दिल्ली की झुग्गियों मे कचरा बीनने का काम कर रहा था। इसी साल 18 जून को सुनाली को दिल्ली के काटजू नगर थाना इलाके की पुलिस ने रोहिणी के सेक्टर 26 में मौजूद बंगाली बस्ती से हिरासत में लिया था। पुलिस को उनके बांग्लादेशी घुसपैठिया होने का शक था।
बांग्लादेश
सरकार ने अवैध प्रवासी बताकर बांग्लादेश निर्वासित कर दिया
27 जून को सुनाली, उनके पति दानिश और बेटे को बांग्लादेश निर्वासित कर दिया गया। उनके साथ बीरभूम के एक और परिवार स्वीटी बीबी और उसके 2 बेटे- कुर्बान शेख और इमाम दीवान को भी बांग्लादेश भेज दिया गया। बांग्लादेश ने इन 6 लोगों को घुसपैठिया मानते हुए 20 अगस्त से चपाई नवाबगंज जेल में बंद कर दिया। हालांकि, 1 दिसंबर को स्थानीय कोर्ट ने सभी को 5,000 टका के मुचलके पर जमानत दे दी थी।
सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट कैसे पहुंचा मामला?
सुनाली के पिता भोदू शेख ने दावा किया कि उनका परिवार 20 साल से पश्चिम बंगाल और दिल्ली में रह रहा है और सभी के पास भारतीय नागरिकता है। इस आधार पर उन्होंने कलकत्ता हाई कोर्ट में याचिका दायर की। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को परिवार को भारत वापस लाने का आदेश दिया। इसके खिलाफ केंद्र सरकार सुप्रीम कोर्ट पहुंच गई। सुप्रीम कोर्ट में मामले पर लंबी सुनवाई हुई।
कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट में सरकार को लगी थी फटकार
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को फटकार लगाते हुए कहा कि अवैध प्रवासियों को बिना उचित प्रक्रिया के निर्वासित नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने सुनाली के परिवार द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों के आधार पर कहा कि पुलिस के दावे गलत हैं। कोर्ट ने कहा, "अगर कोई कहता है कि वह भारत में पैदा हुआ और बड़ा हुआ है, तो उसके अधिकार हैं। उनकी बात सुनी जानी चाहिए।" कोर्ट ने सुनाली को वापस लाने का आदेश दिया था।
बयान
सुनाली बोली- भारत लौटकर बहुत खुश
5 दिसंबर की शाम सुनाली और उसके बेटे को महादीपुर सीमा चौकी के जरिए भारत को सौंप दिया गया। हालांकि, बाकी 4 लोग अभी भी बांग्लादेश में ही है। मेडिकल जांच के बाद सुनाली को आज अपने गांव जाने की अनुमति दी जा सकती है। सुनाली ने मीडिया से कहा, "मैं भारत लौटकर बहुत खुश हूं। मैं चाहती हूं कि मेरे पति भी भारत आ जाए।" तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भी इसे गरीब परिवार के लिए बड़ी जीत बताया।