डेढ़ करोड़ के इनामी नक्सली देवजी के आत्मसमर्पण की खबरें, साथी संग्राम ने भी डाले हथियार
क्या है खबर?
नक्सलवाद के खिलाफ चल रही मुहिम के बीच भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (CPI माओवादी) के महासचिव टिप्पिरी तिरुपति उर्फ देवजी के आत्मसमर्पण की खबरें हैं। बताया जा रहा है कि देवजी ने अपने साथी संग्राम के साथ तेलंगाना पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया है। हालांकि, पुलिस ने अभी तक इसकी अधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अगर देवजी के आत्मसमर्पण की आधिकारिक पुष्टि होती है, तो एक साल के भीतर दूसरी बार संगठन नेतृत्व विहीन हो जाएगा।
रिपोर्ट
देवजी ने आसिफाबाद में किया आत्मसमर्पण, आधिकारिक पुष्टि नहीं
द हिंदू ने बताया है कि देवजी ने तेलंगाना के आसिफाबाद जिले में हथियार डाले हैं। वहीं, दैनिक भास्कर से बात करते हुए छत्तीसगढ़ के बस्तर के IG सुंदरराज पी ने कहा, "सीमावर्ती राज्य में कुछ वरिष्ठ नक्सली कैडरों के आत्मसमर्पण की खबरों को लेकर काफी चर्चा चल रही है। प्रोटोकॉल के अनुसार, ऐसी किसी भी घटना, कार्रवाई या घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि केवल संबंधित एजेंसियों या संबंधित राज्य अधिकारी ही कर सकते हैं।"
परिचय
बसवा राजू के एनकाउंटर के बाद देवजी ने संभाली संगठन की कमान
देवजी तेलंगाना के करीमनगर का रहने वाला है। उसे तिप्पिरी तिरुपति उर्फ संजीव पल्लव नाम से भी जाना जाता है। वह नक्सलियों की सेंट्रल मिलिट्री कमांड का प्रमुख रह चुका है। मई, 2025 में बसवा राजू की मौत के बाद देवजी को CPI (माओवादी) का महासचिव बनाया गया था। उस पर केवल छत्तीसगढ़ में ही एक करोड़ रुपये का इनाम घोषित है। फिलहाल वो संगठन का सबसे बड़ा नेता है।
हमले
इन हमलों में शामिल रहा है देवजी
देवजी करीब साढ़े तीन दशक से नक्सलवाद से जुड़ा हुआ है। उसे गुरिल्ला युद्ध का अनुभवी माना जाता है। अप्रैल, 2010 में दंतेवाड़ा में CRPF के काफिले पर हुए हमले में 76 जवान मारे गए थे। ये सुरक्षा बलों पर सबसे घातक नक्सली हमला था। वहीं, मार्च, 2007 में बीजापुर के रानी बोदली में नक्सली हमले में 55 जवान मारे गए थे। इन दोनों हमलों में देवजी का हाथ बताया जाता है।
लक्ष्य
मार्च, 2026 तक नक्सलवाद खत्म करने का है लक्ष्य
24 अगस्त, 2024 को गृह मंत्री अमित शाह ने मार्च, 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म करने की बात कही थी। उन्होंने कहा था, "लेफ्ट विंग माओवाद के खिलाफ लड़ाई अंतिम चरण में है। अब समय आ गया है कि वामपंथी उग्रवाद पर एक मजबूत रणनीति और निर्मम दृष्टिकोण के साथ अंतिम प्रहार किया जाए। पिछले साल बजट सत्र के दौरान भी गृह मंत्री ने दोहराया था कि 31 मार्च, 2026 तक भारत नक्सलवाद मुक्त हो जाएगा।