इजरायल ने भारत को 'गोल्डन होराइजन' मिसाइल की पेशकश की, ये ब्रह्मोस से तेज; जानें खासियत
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसी हफ्ते इजरायल के दौरे पर जा रहे हैं। इससे पहले खबर आई है कि इजरायल ने कथित तौर पर भारत को गोल्डन होराइजन एयर-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल (ALBM) की विशेष पेशकश की है। ये पहली बार है, जब इजरायल ने ये मिसाइल किसी देश को बेचने का प्रस्ताव रखा है। कहा जा रहा है कि भारत इजरायल के इस प्रस्ताव पर विचार कर रहा है। आइए इन मिसाइलों की खासियत जानते हैं।
मिसाइल
गोल्डन होराइजन मिसाइल के बारे में जानिए
'गोल्डन होराइजन' मिसाइलों को मजबूत और भूमिगत रणनीतिक सुविधाओं को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। इन्हें भारत के सुखोई Su-30MKI लड़ाकू विमानों ने लॉन्च किया जा सकता है। करीब 8 मीटर लंबी और 3 टन वजनी ये मिसाइल प्रणाली इजरायल की सिल्वर स्पेरो मिसाइल से ली गई है। इसमें सुधार कर इसे परिचालन हथियार में रूपांतरित किया गया है, जिसे लड़ाकू विमानों से लॉन्च किया जा सकता है।
खासियत
क्या है मिसाइल की खासियत?
अलग-अलग रिपोर्टों के मुताबिक, मिसाइल की रेंज 1,000 से 2,000 किलोमीटर के बीच है। रक्षा विशेषज्ञों का अनुमान है कि इसकी अधिकतम रफ्तार हाइपरसोनिक स्तर तक पहुंच सकती है, यानी आवाज की गति से 5 गुना ज्यादा। ऐसे में पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों द्वारा इसे रोकना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। ये मिसाइल हाई प्रिसिजन हमला करने के लिए एडवांस्ड डुअल इनर्शियल और GPS गाइडेंस सिस्टम का इस्तेमाल करती है। सबसे बड़ी खासियत इसकी हवा से दागे जाने की क्षमता है।
भारत
मिसाइल मिलने से कितनी बढ़ेगी भारत की ताकत?
इस मिसाइल को भारतीय वायुसेना के सुखोई Su-30MKI विमानों के साथ जोड़ा जाएगा, जिससे वायु सेना की दूर से हमला करने की क्षमता बढ़ेगी। जमीन से लॉन्च होने वाली बैलेस्टिक मिसाइल कई देशों के पास हैं, लेकिन हवा से लॉन्च होने वाली ये मिसाइल भारत को एक कदम आगे रखेगी। मैक 5 से ज्यादा गति और आधुनिक तकनीक के चलते ये पारंपरिक वायु रक्षा प्रणालियों की पकड़ में नहीं आती है।
पाकिस्तान
चीन-पाकिस्तान गठबंधने के नजरिए से भी अहम
सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार भारत के सामने चीन-पाकिस्तान की संयुक्त चुनौती को लेकर चिंताए जताते रहे हैं। चीन उत्तरी मोर्चे पर अपनी तैनाती बढ़ा रहा है, तो पाकिस्तान पश्चिम में चीन से मिले हथियारों के जरिए स्थिति मजबूत करने में जुटा है। ऐसी स्थिति में इस मिसाइल की लंबी दूरी, हवा से लॉन्च करने की क्षमता और भूमिगत रणनीतिक स्थानों पर हमला करने की खूबियों के चलते भारत अपने विमानों और जवानों को खतरे में डाले बिना निपट सकेगा।