#NewsBytesExplainer: क्या चीनी की बढ़ती कीमतों के पीछे एथेनॉल नीति है वजह?
क्या है खबर?
देश में चीनी की कीमत लगातार बढ़ती जा रही है। कई जगहों पर चीनी के दाम 55 रुपये प्रति किलो से भी ज्यादा हो गए हैं। इसके बाद सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात पर से टैक्स हटा दिया है। पिछले करीब एक दशक में ये पहली बार है, जब भारत चीनी का आयात करने जा रहा है। आइए जानते हैं चीनी के बढ़ते दामों की वजह क्या है।
कीमत
बीते कुछ दिनों में कैसे बढ़ी चीनी की कीमतें?
उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों से पता चला है कि खुदरा चीनी की औसत कीमतों में एक महीने में लगभग 16 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
जुलाई के अंत में चीनी के दाम 48.18 रुपये प्रति किलोग्राम थे, जो 20 अगस्त तक बढ़कर 55.70 रुपये प्रति किलोग्राम हो गए हैं।
महाराष्ट्र, दिल्ली और उत्तर प्रदेश के स्थानीय खुदरा बाजारों में तो कीमतें 60 रुपये से 80 रुपये प्रति किलोग्राम तक हो गई है।
फसल
खराब मौसम से गन्ने की फसल का उत्पादन कम
खराब मौसम और मानसून की बेरुखी के कारण गन्ने की फसल प्रभावित हुई है। गन्ने को ज्यादा पानी की जरूरत होती है।
2025-26 के सीजन की शुरुआत में, राज्य के कृषि विभागों और उद्योग निकायों ने 34.3 मीट्रिक टन गन्ने की उपज का अनुमान लगाया था। हालांकि, कृषि मंत्रालय द्वारा बाद में किए गए बाद के पुनर्मूल्यांकनों में चीनी का अनुमानित शुद्ध उत्पादन घटकर लगभग 30.6 मीट्रिक टन रह गया।
एथेनॉल
क्या एथेनॉल नीति भी है वजह?
सरकार पेट्रोल में एथेनॉल मिला रही है, जिसके उत्पादन में गन्ने का इस्तेमाल होता है।
अकेले 2025-26 सीजन में, लगभग 30 लाख मीट्रिक टन चीनी के बराबर गन्ने का शीरा एथेनॉल बनाने में इस्तेमाल कर लिया गया। इससे भारत के कुल चीनी उत्पादन का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा बनाया जा सकता था।
इससे खाद्य चीनी भंडार पर सीधा दबाव पड़ा और सरकार को आयात की ओर कदम बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ा।
मौसम
मौसम ने कैसे प्रभावित किया गन्ने का उत्पादन?
पश्चिमी और दक्षिणी राज्यों में मानसूनी बारिश असमान रही। महाराष्ट्र-कर्नाटक के कुछ हिस्सों में दीर्घकालिक औसत से 10 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।
साथ ही उत्तर प्रदेश जो गन्ने का बड़ा उत्पादक है, में बादल फटने और खराब जल निकासी के कारण निचले इलाकों में स्थित गन्ने के खेतों में पानी भरा रहा।
इस नमी से गन्ने की फसल फफूंद और कीटों की चपेट में आ गई। 'गन्ने का कैंसर' कही जाने वाली लाल सड़न ने फसलों को बर्बाद किया।
निर्यात
अप्रैल तक होता रहा चीनी का निर्यात
चीनी का उत्पादन प्रभावित होने के बावजूद निर्यात जारी रहा। सरकार ने नवंबर 2025 में 15 लाख टन चीनी के निर्यात को मंजूरी दी थी। फरवरी 2026 में 5 लाख टन और चीनी निर्यात को मंजूरी मिली।
कीमतें बढ़ने पर सरकार सक्रिय हुई और मई में निर्यात पर रोक लगाई। हालांकि, तब तक 8 लाख टन चीनी देश से बाहर भेजी जा चुकी थी, जिसके चलते चीनी का भंडार 47 लाख टन से घटकर 39 लाख टन हो गया।
आगे की स्थिति
क्या आगे और बढे़ंगे दाम?
मानसून में कमी और आने वाले त्योहारी सीजन को देखते हुए अनुमान है कि चीनी की कीमतें और बढ़ सकती हैं। बॉम्बे शुगर मर्चेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक जैन ने दैनिक भास्कर से कहा, "त्योहारी सीजन से पहले मांग में तेजी के चलते मिलें स्टॉक को धीरे-धीरे छोड़ रही हैं, क्योंकि उन्हें कीमतों में और बढ़ोत्तरी की उम्मीद है।"
हालांकि, सरकार ने आयात में टैक्स पर छूट दी है और स्टॉक को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाए हैं।