मानसून का अजब खेल: जून सूखा, जुलाई सैलाब... आखिर क्यों?
इस साल भारत में मानसून का मिजाज काफी गड़बड़ रहा है। जून में तो भीषण सूखा पड़ा, जो अब तक का 5वां सबसे सूखा महीना रिकॉर्ड किया गया। वहीं, जुलाई में अचानक इतनी जोरदार बारिश हुई कि मुंबई में एक हफ्ते में ही पूरे महीने के बराबर पानी गिर गया। इतनी तेज बारिश के बावजूद, पूरे देश में अभी भी औसत से काफी कम पानी बरसा है। इस वजह से किसान और शहरों में रहने वाले लोग दोनों ही परेशान हैं।
बुवाई का समय तय नहीं, शहरों में बिजली की मांग बढ़ी
किसानों को समझ नहीं आ रहा है कि वे फसलें कब बोएं, क्योंकि बारिश का कोई भरोसा नहीं है। इससे उनकी कमाई पर सीधे-सीधे असर पड़ रहा है। उधर, शहरों में सूखे वाले दिनों में गर्मी और उमस काफी बढ़ रही है। लोग खूब एयर कंडीशनर चला रहे हैं, जिससे बिजली की मांग भी आम दिनों से कहीं ज्यादा हो गई है।
आधिकारिक अनुमान कम बारिश का, विशेषज्ञों की चेतावनी
मौसम विभाग ने अनुमान लगाया है कि इस मानसून सीजन में औसत से थोड़ी कम बारिश होगी। लेकिन मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और 'अल नीनो' की वजह से मानसून का पूरा मिजाज बिगड़ गया है। ये दोनों मिलकर बारिश वाले बादलों को आगे बढ़ने से रोकते हैं, भले ही हवा में नमी अच्छी-खासी हो।
बेंगलुरु में तो पिछले 112 सालों में सबसे गर्म जुलाई का दिन रिकॉर्ड किया गया, वहीं कई और जगहों पर भी तापमान सामान्य से कई डिग्री ऊपर बना हुआ है। कुछ विशेषज्ञ तो यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं, इसलिए किसानों और शहरी योजना बनाने वालों दोनों के लिए यह बड़ी चिंता की बात है।