बंपर पैदावार के बाद भी हताश हैं किसान, MSP से नीचे फसल बेचने को हो रहे मजबूर
देश का अनाज भंडार काफी बढ़ गया है। 1 अप्रैल, 2026 तक भारत के पास कुल 604 लाख टन अनाज पहुंच गया है। यह आंकड़ा सरकारी बफर स्टॉक की तय जरूरत से लगभग 3 गुना ज्यादा है। इस विशाल भंडार में मुख्य रूप से चावल (386 लाख टन) और गेहूूं (218 लाख टन) शामिल हैं। दोनों का ही स्टॉक तय जरूरत से कहीं ज्यादा है, जिससे आने वाले समय में देश में अनाज की कमी की कोई चिंता नहीं है।
गेहूं और मक्के के दाम सरकारी समर्थन मूल्य से कम
यह अतिरिक्त अनाज भंडार देश की जरूरतों को पूरा करने में बहुत सहायक है। इसके कारण सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के लाभार्थियों को उनका तय हिस्सा लगातार मिलता रहता है, जिससे बाजार में अनाज की कमी की आशंका नहीं रहती। वहीं, रबी सीजन में अभी फसल कटाई का काम तेजी से चल रहा है। हालांकि, इस समय गेहूं और मक्के के दाम सरकारी समर्थन मूल्य (MSP) से नीचे बने हुए हैं। किसानों के लिए यह अच्छी खबर नहीं है, क्योंकि उन्हें अपनी उपज का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है।