चाबहार बंदरगाह से बाहर निकल सकता है भारत, ईरानी कंपनी को हिस्सेदारी बेचने की तैयारी- रिपोर्ट
क्या है खबर?
ईरान के चाबहार बंदरगाह को लेकर भारत जल्द ही बड़ा फैसला ले सकता है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि भारत बंदरगाह में अपनी हिस्सेदारी ईरान की किसी कंपनी को बेचने पर विचार कर रहा है। हालांकि, सरकार ने इस पर कोई आधिकारिक टिप्पणी नहीं की है। दरअसल, अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह से व्यापार पर प्रतिबंध लगा रखे हैं। इन प्रतिबंधों से भारत को मिली छूट 26 अप्रैल को खत्म हो रही है।
रिपोर्ट
ईरानी कंपनी को हिस्सेदारी बेचने पर हो रहा विचार
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रस्ताव तैयार किया गया है, जिसमें सरकार ने इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल चाबहार फ्री जोन (IPGCFZ) में इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल (IPGL) की हिस्सेदारी एक ईरानी कंपनी को बेचने का विचार रखा है। भारत एक ऐसी व्यवस्था पर विचार कर रहा है, जिसके तहत अमेरिकी प्रतिबंध जारी रहने तक एक ईरानी कंपनी बंदरगाह का संचालन संभालेगी और यह गारंटी दी जाएगी कि प्रतिबंध हटने के बाद इसे फिर भारत को सौंप दिया जाएगा।
वजह
क्यों ऐसा कदम उठा सकता है भारत?
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत सरकार ने चाबहार परियोजना में निरंतर भागीदारी के जोखिमों का आंतरिक रूप से आकलन किया है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अगर प्रतिबंधों में छूट नहीं मिलती है तो बंदरगाह में शामिल कंपनियां प्रभावित हो सकती हैं और उन पर भी प्रतिबंध लग सकता है। अगर ऐसा होता है तो वैश्विक बंदरगाह उद्योग में भारत की अग्रणी भूमिका निभाने की योजनाओं में बाधा आ सकती है।
प्रतिबंध
अमेरिका ने क्यों लगाया है प्रतिबंध?
दरअसल, 2018 में अमेरिका ने चाबहार को अफगानिस्तान की मदद और विकास के लिए छूट दी थी। हालांकि, सितंबर, 2025 में इस छूट को खत्म करने का ऐलान किया था। अमेरिका का कहना है कि अब अफगानिस्तान में तालिबानी शासन है और बंदरगाह के संचालन से ईरान फायदा उठा रहा है। अमेरिका ने कहा था कि अब से जो लोग बंदरगाह को चलाने, पैसे देने या उससे जुड़े किसी काम में शामिल होंगे, वे अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में होंगे।
अहमियत
भारत के लिए कितना अहम चाबहार बंदरगाह?
भारत के लिए चाबहार रणनीतिक रूप से बेहद अहम है। यह पाकिस्तान को दरकिनार करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया के लिए सीधा रास्ता प्रदान करता है। यह अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) का भी एक प्रमुख केंद्र है, जो भारत को रूस और यूरोप से जोड़ता है। भारत यहां से सामान सीधा अफगानिस्तान और मध्य एशिया भेज सकता है। ये पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के नजदीक है, इसलिए इसे चीन-पाकिस्तान के गठबंधन का जवाब माना जाता है।