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सिंधु जल संधि रद्द करने से तिलमिलाया पाकिस्तान, अब UN में उठाया पानी का मुद्दा
पाकिस्तान ने फिर सिंधु जल संधि का मुद्दा UN में उठाया है

सिंधु जल संधि रद्द करने से तिलमिलाया पाकिस्तान, अब UN में उठाया पानी का मुद्दा

लेखन आबिद खान
Jan 21, 2026
03:05 pm

क्या है खबर?

भारत का सिंधु जल संधि को रद्द करने का फैसला पाकिस्तान पर भारी पड़ता जा रहा है। अब पाकिस्तान ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र (UN) में उठाया है। पाकिस्तान ने कहा कि भारत के फैसले ने उसकी जल सुरक्षा के लिए संकट पैदा कर दिया है। कनाडा और संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय जल नीति बैठक में पाकिस्तान के राजदूत उस्मान जदून ने ये मुद्दा उठाया है।

बयान

पाकिस्तान ने कहा- भारत पानी को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा

उस्मान ने भारत पर 1960 की संधि का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत के हालिया आचरण में पाकिस्तान की ओर जल प्रवाह को बिना पूर्व सूचना के बाधित करना और महत्वपूर्ण जलवैज्ञानिक डेटा को छिपाना शामिल है। उन्होंने दावा किया कि इन कार्रवाइयों ने पाकिस्तान के लिए जल आपूर्ति को और अधिक अनिश्चित बना दिया है, जो कृषि और रोजमर्रा की जिंदगी के लिए सिंधु बेसिन पर काफी हद तक निर्भर है।

टिप्पणी

पाकिस्तान बोला- यह एक वास्तविक समस्या

उस्मान ने कहा कि पाकिस्तान के लिए जल असुरक्षा कोई सैद्धांतिक समस्या नहीं है, बल्कि यह एक वास्तविक समस्या है। उन्होंने कहा कि देश की अर्ध-शुष्क जलवायु, बढ़ती जनसंख्या, ग्लेशियरों का पिघलना, सूखा और बाढ़ जैसे कारण पहले से ही जल प्रणालियों पर दबाव डाल रहे हैं। उन्होंने बताया कि सिंधु बेसिन पाकिस्तान की कृषि संबंधी जल आवश्यकताओं के 80 प्रतिशत से ज्यादा की पूर्ति करता है और करोड़ों लोगों की आजीविका के लिए जरूरी है।

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पाकिस्तान

पाकिस्तान ने कहा था- संधि को रोकने का प्रावधान नहीं है

इससे पहले पाकिस्तानी विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा था कि पश्चिमी नदियों पर भारत की कोई भी विकास परियोजना या कथित उल्लंघनपूर्ण गतिविधि को पाकिस्तान राजनीतिक, राजनयिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाएगा। ताहिर ने कहा था, "सिंधु समझौता एक बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय समझौता बना हुआ है और इसे रोकने का कोई प्रावधान नहीं है। अगर नदियों में कुछ विकास कार्य होते हैं, तो जाहिर है कि हम इसे भारत के साथ सिंधु आयुक्त के स्तर पर उठाएंगे।"

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समझौता

पहलगाम हमले के बाद भारत ने रद्द की थी संधि

भारत ने 22 अप्रैल, 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के बाद सख्त कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया था। भारत ने कहा था कि खून और पानी साथ नहीं बह सकता। इसके बाद पाकिस्तान ने भारत को 4 पत्र लिखकर संधि पर चर्चा का अनुरोध किया था। पाकिस्तान भारत के फैसले को अवैध और एकतरफा बताते हुए विश्व बैंक भी गया था, लेकिन वहां से भी उसे झटका लगा था।

प्लस

न्यूजबाइट्स प्लस

विश्व बैंक की मध्यस्थता से 1960 में पूर्व प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन पाकिस्तानी राष्ट्रपति अयूब खान के बीच सिंधु जल संधि हुई थी। इसके तहत सिंधु घाटी में बहने वाली 3 पूर्वी नदियों (रवि, सतलज, व्यास) पर भारत का, जबकि 3 पश्चिमी नदियों (सिंधु, झेलम, चिनाब) पर पाकिस्तान का अधिकार है। नदियां भारत से होकर बहती हैं, इसलिए पश्चिमी नदियों के 20 प्रतिशत पानी पर भारत का अधिकार है, वो सिंचाई समेत अन्य परियोजनाओं में इसका उपयोग करता है।

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