चाबहार बंदरगाह पर उपस्थिति बनाए रखने के विकल्प तलाश रहा भारत- रिपोर्ट
क्या है खबर?
अमेरिका की ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति ने भारत की चाबहार बंदरगाह परियोजना को संकट में डाल दिया है। ट्रंप प्रशासन ने चाबहार बंदरगाह पर लागू अमेरिकी प्रतिबंधों से भारत को अप्रैल तक छूट दी है। अब खबर आई है कि भारत चाबहार बंदरगाह पर अपनी उपस्थिति बनाए रखने के लिए कई विकल्पों पर विचार कर रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस मुद्दे पर अमेरिका के साथ लगातार चर्चा में है।
रिपोर्ट
दंडात्मक अमेरिकी कार्रवाई से बचने के लिए कदम उठा रहा भारत- रिपोर्ट
हिंदुस्तान टाइम्स ने सूत्रों के हवाले से बताया कि सरकार ने अपनी संस्थाओं और अधिकारियों को प्रतिबंधों के प्रभाव से बचाने के लिए कई कदम उठाए हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि सरकारी संस्थाओं और अधिकारियों को अमेरिका की किसी भी दंडात्मक कार्रवाई का सामना न करना पड़े। इसी के चलते इंडिया पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड के बोर्ड में कार्यरत सभी सरकारी अधिकारियों ने पदों से इस्तीफा दे दिया है।
निवेश
भारत ने 1,100 करोड़ रुपये निवेश किए
रिपोर्ट में सूत्रों ने स्वीकार किया कि भारत ने शाहिद बेहेश्टी टर्मिनल पर दीर्घकालिक संचालन के लिए मई, 2024 में ईरान के साथ हुए 10 वर्षीय समझौते के तहत 1,100 करोड़ रुपये का पूरा निवेश कर दिया है। समझौते के तहत, इस राशि का इस्तेमाल शाहिद बेहेश्टी टर्मिनल को और अधिक सुसज्जित करने के लिए किया जाना था, जिसमें मोबाइल हार्बर क्रेन, रेल-माउंटेड क्रेन, फोर्कलिफ्ट और न्यूमेटिक अनलोडर जैसे उपकरणों की खरीद शामिल थी।
संचालन
प्रबंधन के लिए नई इकाई गठित कर सकता है भारत
रिपोर्ट में कहा गया है कि जिन विकल्पों पर विचार किया जा रहा है, उनमें से एक यह है कि शाहिद बेहेश्टी टर्मिनल पर संचालन के लिए एक ऐसी इकाई का गठन किया जाए, जो प्रतिबंधों के दायरे में न आए या उनका सामना करने में सक्षम हो। एक सूत्र ने कहा, "हमारे पास अभी भी 4 महीने हैं और हम यह देखने के लिए अमेरिका के साथ बातचीत जारी रखे हुए हैं कि क्या किया जा सकता है।"
प्रतिबंध
अमेरिका ने क्यों लगाया है प्रतिबंध?
दरअसल, 2018 में अमेरिका ने चाबहार को अफगानिस्तान की मदद और विकास के लिए छूट दी थी। हालांकि, सितंबर, 2025 में इस छूट को खत्म करने का ऐलान किया था। अमेरिका का कहना है कि अब अफगानिस्तान में तालिबानी शासन है और बंदरगाह के संचालन से ईरान फायदा उठा रहा है। अमेरिका ने कहा था कि अब से जो लोग बंदरगाह को चलाने, पैसे देने या उससे जुड़े किसी काम में शामिल होंगे, वे अमेरिकी प्रतिबंधों के दायरे में होंगे।
अहमियत
भारत के लिए कितना अहम है चाबहार बंदरगाह?
चाबहार बंदरगाह को भारत और ईरान मिलकर विकसित कर रहे हैं। भारत ने 2024 में चाबहार को 10 साल के लिए लीज पर लिया है। इसके तहत भारत यहां करीब 1,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा और 2,200 करोड़ रुपये का कर्ज देगा। चाबहार के जरिए भारत अफगानिस्तान, मध्य एशिया, रूस और यूरोप से सीधे व्यापार करता है। पहले इन देशों तक पहुंच के लिए भारत को पाकिस्तान से गुजरना पड़ता था।