#NewsBytesExplainer: दिल्ली में 22 अरब देशों के साथ भारत की बैठक कितनी अहम, क्या है एजेंडा?
क्या है खबर?
भारत 30 और 31 जनवरी को अरब देशों के विदेश मंत्रियों की मेजबानी करेगा। इस दूसरी भारत-अरब विदेश मंत्रियों की बैठक (IAFMM) में 20 से ज्यादा अरब देशों के विदेश मंत्री शामिल होंगे। बैठक की अध्यक्षता भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) कर रहे हैं, जिसमें अन्य सदस्य देश प्रतिभागी के तौर पर शामिल होंगे। IAFMM का पहला संस्करण 2016 में बहरीन में आयोजित किया गया था। आइए इस बैठक की अहमियत समझते हैं।
IAFMM
सबसे पहले IAFMM के बारे में जानिए
भारत और अरब राज्यों के लीग (LAS) के बीच हुए समझौते के बाद 2002 में IAFMM को औपचारिक रूप दिया गया था। 2008 में तत्कालीन अरब लीग के महासचिव अमरे मूसा की भारत यात्रा के दौरान अरब-भारत सहयोग मंच की स्थापना के लिए एक सहयोग ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए थे। 2013 में इसे बदलकर हर 2 साल में होने वाली मंत्रिस्तरीय और वार्षिक वरिष्ठ अधिकारियों की बैठक कर दिया गया। बता दें कि भारत अरब लीग का पर्यवेक्षक है।
बैठक
अब बैठक के बारे में जानिए
ये बैठक पहली बार दिल्ली में होने जा रही है। इसमें सभी 22 अरब देशों के विदेश मंत्री, अन्य मंत्री और वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे। इससे पहले 30 जनवरी को चौथी भारत-अरब वरिष्ठ अधिकारी बैठक भी आयोजित की जाएगी। इस बैठक में फिलिस्तीन, सूडान, मिस्र, जिबूटी, अल्जीरिया, कोमोरोस, जॉर्डन अरब राज्यों का संघ, कुवैत, यमन, सऊदी अरब, बहरीन सोमालिया, लेबनान, कतर, सीरिया, लीबिया, मॉरिटानिया, इराक और ओमान के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
एजेंडा
क्या रहेगा बैठक का एजेंडा?
रिपोर्ट के मुताबिक, बैठक का फोकस भारत और अरब देशों के बीच राजनीतिक और रणनीतिक सहयोग, आतंकवाद और समुद्री सुरक्षा व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय शांति और स्थिरता पर होगा। इससे पहले 2016 में बहरीन में हुई बैठक में मंत्रियों ने सहयोग के 5 प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की थी। इनमें अर्थव्यवस्था, ऊर्जा, शिक्षा, मीडिया और संस्कृति शामिल थे। इसके अलावा इन क्षेत्रों में गतिविधियों का एक समूह प्रस्तावित किया गया था।
भारत
भारत के लिए क्या हैं बैठक के मायने?
भारत अपने कुल कच्चा तेल का 60 प्रतिशत अरब देशों से आयात करता है। इस वजह से ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से ये बैठक अहम है। बैठक में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (IMEC) पर चर्चा होने की उम्मीद है। अरब देशों की राजनीतिक सहमति पर चर्चा हो सकती है। खाड़ी देशों में करीब 90 लाख भारतीय काम करते हैं। बैठक में इनकी सुरक्षा, वीजा नियमों और संकट के समय सुरक्षित निकासी जैसे मुद्दों पर भी बातचीत होने की संभावना है।
चीन
चीन-पाकिस्तान को साधने के लिए भी बैठक अहम
IMEC कॉरिडोर को चीन की बेल्ट एंड रोड पहल के विकल्प के रूप में देखा जाता है। इस पर बातचीत आगे बढ़ाने चीन के खिलाफ कूटनीतिक सफलता मानी जाएगी। यह बैठक पाकिस्तान को लेकर भी अहम है। अरब देशों का भारत की ओर निवेश, रणनतीकि स्तर पर भारत के साथ साझेदारी और ऑर्गनाजेशन ऑफ इस्लामिक कोऑपरेशन जैसे मंचों पर भारत-विरोधी स्वर का कमजोर होना भी अरब देशों के साथ भारत की बढ़ती साझेदारी का संकेत है।
अहमियत
कितनी अहम है बैठक?
यह बैठक ऐसे समय हो रही है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 'गाजा शांति बोर्ड' का गठन किया है। इससे अरब देशों में फिलिस्तीनी इलाके में शासन और संप्रभुता को लेकर बहस शुरू हो गई है। ये भारत के कूटनीतिक तालमेल का भी संकेत है। इजरायल के साथ मजबूत रिश्ते बनाते हुए अरब देशों के साथ भी गहरे राजनीतिक और आर्थिक संबंध बनाए रखना। अमेरिकी टैरिफ के बीच ये व्यापार को विकेंद्रीकृत करने का भी मौका है।