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I-PAC मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मुख्यमंत्री जांच में हस्तक्षेप कर लोकतंत्र खतरे में नहीं डाल सकतीं
I-PAC मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लेकर सख्त टिप्पणी की है

I-PAC मामला: सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मुख्यमंत्री जांच में हस्तक्षेप कर लोकतंत्र खतरे में नहीं डाल सकतीं

लेखन आबिद खान
Apr 22, 2026
04:34 pm

क्या है खबर?

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जुड़ी प्रवर्तन निदेशालय (ED) की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई है। इस दौरान कोर्ट ने कहा कि एक मुख्यमंत्री इस तरह के कार्यों से लोकतंत्र को नुकसान नहीं पहुंचा सकता। कोर्ट ने कहा, "राज्य का मुख्यमंत्री जांच के बीच में आकर लोकतंत्र को खतरे में नहीं डाल सकता और यह नहीं कह सकता कि इसे राज्य और केंद्र के बीच का विवाद न बनाएं।"

टिप्पणी

कोर्ट ने कहा- ये कृत्य लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए किया

कोर्ट ने कहा, "यह अपने आप में एक ऐसा कृत्य है जो मुख्यमंत्री द्वारा पूरे लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए किया गया है। आपने हमें सीरवाई और अंबेडकर के बारे में बताया, लेकिन उनमें से किसी ने भी इस देश में ऐसी स्थिति की कल्पना नहीं की होगी कि एक दिन कोई मौजूदा मुख्यमंत्री ऐसा करेगा।" कोर्ट इस दलील से भी सहमत नहीं हुआ कि अनुच्छेद 32 से जुड़े प्रश्नों का निर्णय एक बड़ी पीठ द्वारा किया जाए।

बयान

कोर्ट बोला- वास्तविकता से आंखें नहीं मूंद सकते

कोर्ट ने कहा कि वह पश्चिम बंगाल की जमीनी हकीकतों से आंखें नहीं मूंद सकता। कोर्ट ने कहा, "जिस दूसरी पीठ के समक्ष FIR का मामला विचाराधीन है, वहां हमने देखा है कि कई न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाकर रखा गया था। हम वास्तविकता से आंखें नहीं मूंद सकते। हम राज्य में मौजूद व्यावहारिक स्थिति को नजरअंदाज नहीं कर सकते। हमें टिप्पणियां करने के लिए विवश न करें। यह एक असाधारण स्थिति है जहां परिस्थितियां पूरी तरह से भिन्न हैं।

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मांग

याचिका के समर्थन और विरोध में तर्क

ED की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने और मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पेश वकील कपिल सिब्बल और अभिषेक मनु सिंघवी ने याचिका की वैधता पर सवाल उठाया है। उन्होंने तर्क दिया कि ED एक सरकारी विभाग है, इसलिए वह मौलिक अधिकारों का दावा करते हुए अनुच्छेद 32 के तहत सुप्रीम कोर्ट नहीं जा सकती।

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मामला

क्या है मामला?

दरअसल, इसी साल 8 जनवरी को ED ने कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग मामले में I-PAC के ठिकानों पर छापा मारा था। इस दौरान ममता कई पुलिसकर्मियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ I-PAC के कार्यालय और संस्थापक प्रतीक जैन के आवास पर पहुंच गई थीं। आरोप थे कि ममता ने जांच में दखल देते हुए लैपटॉप, मोबाइल फोन और चुनाव से जुड़े दस्तावेज हटवा दिए थे। ED ने कहा कि इससे जांच प्रभावित हुई और काम में बाधा आई।

छापा

ED ने I-PAC कार्यालय पर क्यों मारा था छापा?

ये मामला ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्र से अवैध तरीके से कोयले की खुदाई और चोरी से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि अनुप माजी इसका मास्टर माइंड था, जिसने ECL क्षेत्र से 2,742 करोड़ रुपये का कोयला अवैध रूप से निकाला। इसके बाद साल 2020 में इस मामले में CBI ने मामला दर्ज किया था। ED का कहना है कि अवैध आय को हवाला के जरिए इधर-उधर किया गया और करोड़ों की राशि I-PAC को मिली।

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