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I-PAC मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा ED, लगाया जांच में बाधा डालने का आरोप
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के हस्तक्षेप को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा प्रवर्तन निदेशालय

I-PAC मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा ED, लगाया जांच में बाधा डालने का आरोप

Jan 10, 2026
05:55 pm

क्या है खबर?

प्रवर्तन निदेशालय (ED) कोलकाता में राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC के कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी के मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। उसने अनुच्छेद 32 के तहत एक याचिका दायर की है, जिसमें आरोप लगाया है कि I-PAC कोयला घोटाला मामले में उसकी जांच में पश्चिम बंगाल सरकार और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा बाधा डाली गई थी। ED ने कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा मामले की सुनवाई स्थगित करने के बाद यह कदम उठाया है।

याचिका

ED ने याचिका में क्या कहा?

ED ने याचिका में कहा है कि मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच करने के उसके अधिकार को राज्य सरकार द्वारा सीमित कर दिया गया है। ऐसे में इस मामले की केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) जांच की जानी चाहिए। ED ने याचिका में I-PAC से जुड़े परिसरों में तलाशी अभियान के दौरान हुई टकराव की घटना का वर्णन करते हुए बताया कि अधिकारियों को कोयला तस्करी जांच से संबंधित सामग्री की तलाशी लेने और जब्त करने से रोका गया था।

संबंध

IPAC कंपनी और कोयला घोटाले का क्या है संबंध?

ED का दावा है कि कोयला घोटाले की बड़ी रकम कोल कंपनी को भेजी गई थी। यह कंपनी I-PAC से जुड़ी बताई जा रही है। इसी जुड़ाव का पीछा करते हुए ED ने कंपनी के परिसरों पर छापेमारी की थी। एजेंसी इस अवैध लेन-देन के पुख्ता सबूत जुटाना चाहती थी। इसी छापेमारी के बाद से विवाद शुरू हुआ। ED का आरोप है कि छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री बनर्जी मौके पर पहुंची और जांच से जुड़े दस्तावेज अपने साथ ले गईं।

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स्थगित

कलकत्ता हाई कोर्ट ने स्थगित की सुनवाई

ED ने शुक्रवार को कलकत्ता हाई कोर्ट में मुख्यमंत्री बनर्जी के खिलाफ कथित तौर पर उसके तलाशी अभियान में बाधा डालने के आरोप में FIR दर्ज करने की मांग करते हुए याचिका दायर की थी। हालांकि, इस मामले की सुनवाई स्थगित कर दी गई क्योंकि कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली एकल-न्यायाधीश पीठ और खंडपीठ दोनों ने कार्यवाही को 14 जनवरी के बाद तक के लिए टाल दिया था। ऐसे में ED ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है।

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आपत्ति

बंगाल सरकार ने भी दर्ज कराई आपत्ति

इससे पहले, ED की कार्रवाई की आशंका जताते हुए पश्चिम बंगाल सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की थी। याचिका एक औपचारिक अनुरोध होता है जिसमें संबंधित पक्ष को सुने बिना किसी मामले में कोई आदेश पारित न करने की मांग की जाती है। राज्य सरकार का यह कदम यह सुनिश्चित करने के उद्देश्य से उठाया गया था कि ED को कोई भी अंतरिम राहत दिए जाने से पहले उसका पक्ष अदालत के समक्ष रखा जाए।

कारण

ED ने I-PAC के दफ्तर पर क्यों मारा छापा?

ये मामला ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) के लीज क्षेत्र से अवैध तरीके से कोयले की खुदाई और चोरी से जुड़ा है। जांच में सामने आया कि अनुप माजी इसका मास्टर माइंड था, जिसने ECL क्षेत्र से 2,742 करोड़ रुपये का कोयला अवैध रूप से निकाला। इसके बाद साल 2020 में इस मामले में CBI ने मामला दर्ज किया था। ED का कहना है कि अवैध आय को हवाला के जरिए इधर-उधर किया गया और करोड़ों की राशि I-PAC को मिली।

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