पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन OPEC से बाहर निकलेगा UAE, भारत पर क्या होगा असर?
क्या है खबर?
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच खुद को पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन OPEC और OPEC+ से बाहर कर लिया है। यह फैसला 1 मई से लागू होगा। इस कदम को OPEC की एकजुटता और प्रभाव के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि इससे भारत जैसे प्रमुख ऊर्जा आयात करने वाले देशों को फायदा हो सकता है। आइए इस कदम का भारत पर असर समझते हैं।
उत्पादन सीमा
UAE बढ़ाएगा कच्चे तेल का उत्पादन
भारत के लिए सबसे बड़ा फायदा UAE की तेल उत्पादन क्षमता बढ़ाने से जुड़ा है। रॉयटर्स के अनुसार, इस कदम से UAE के लिए वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी हासिल करने का रास्ता खुलेगा और हालात सामान्य होने पर उत्पादन में संभावित वृद्धि हो सकती है। AP के मुताबिक, UAE लंबे समय से उत्पादन सीमा का विरोध करता रहा है। इस स्थिति में UAE का ज्यादा निर्यात बाजारों को स्थिर करने में मदद करेगा, जिससे भारत जैसे देशों को लाभ होगा।
OPEC
OPEC का कमजोर होना भारत के लिए फायदेमंद?
UAE के इस कदम से OPEC की वैश्विक तेल आपूर्ति को सख्ती से नियंत्रित करने की क्षमता कमजोर होगी। OPEC में UAE दूसरा सबसे बड़ा तेल उत्पादक है। यानी इसके बाद OPEC की समन्वित उत्पादन कटौती को लागू करने की क्षमता कम हो जाएगी। जानकारों के मुताबिक, कमजोर OPEC अप्रत्यक्ष रूप से भारत के ऊर्जा सुरक्षा हितों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। हालांकि, कुछ जानकारों का मानना है कि इससे तेल बाजार में अधिक अस्थिरता आ सकती है
संबंध
भारत को मिलेगा UAE से मजबूत संबंधों का फायदा
भारत और UAE के मजबूत द्विपक्षीय संबंध हैं। भारत के तेल आयात का लगभग 10 प्रतिशत हिस्सा UAE से आता है। AFP की रिपोर्ट के अनुसार, UAE अब राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता दे रहा है और अधिक स्वतंत्र ऊर्जा रणनीति अपना रहा है, जिससे उसे न केवल उत्पादन में बल्कि वाणिज्यिक समझौतों में भी लचीलापन मिल रहा है। इससे भारत के लिए ज्यादा अनुकूल आपूर्ति अनुबंधों पर बातचीत करने का रास्ता खुल जाता है।
वजह
OPEC क्यों छोड़ रहा है UAE?
UAE ने कहा है कि यह फैसला उसकी दीर्घकालिक रणनीति, आर्थिक विजन और बदलती ऊर्जा प्रोफाइल को दर्शाता है। UAE के ऊर्जा मंत्रालय ने कहा, "OPEC से बाहर निकलने का हमारा फैसला एक नीति आधारित बदलाव को दिखाता है, जो बाजार के दीर्घकालिक सिद्धांतों के अनुरूप है। हम ऊर्जा सुरक्षा के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं और दशकों तक रचनात्मक सहयोग देने के लिए OPEC और उसके सदस्य देशों का आभार व्यक्त करते हैं।"
OPEC
OPEC के बारे में जानिए
OPEC की स्थापना 1960 में ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेजुएला ने की थी। संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के तेल उत्पादन और निर्यात नीतियों का समन्वय करना, वैश्विक तेल की कीमतों को स्थिर रखना और सदस्य देशों के हितों की रक्षा करना है। UAE 1967 में इसमें शामिल हुआ था। UAE के बाहर निकलने के बाद OPEC में 5 संस्थापक देशों के अलावा अल्जीरिया, इक्वेटोरियल गिनी, गैबॉन, लीबिया, नाइजीरिया और कांगो गणराज्य रह जाएंगे।