वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच OPEC और OPEC+ से बाहर निकलेगा UAE, क्या हैं इसके मायने?
क्या है खबर?
संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच मंगलवार को बड़ा फैसला लिया है। उसने खुद को पेट्रोलियम निर्यातक देशों का संगठन (OPEC) और OPEC+ से बाहर कर लिया है। यह फैसला 1 मई से लागू होगा। पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच यह तेल निर्यातक समूहों और सऊदी अरब के लिए बड़ा झटका है। UAE ऊर्जा मंत्री सुहैल मोहम्मद अल-मजरूई ने बताया कि क्षेत्रीय शक्ति की ऊर्जा रणनीतियों पर विचार के बाद फैसला लिया है।
बयान
UAE ने क्या कहा?
UAE के ऊर्जा मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "यह निर्णय UAE के दीर्घकालिक रणनीतिक और आर्थिक दृष्टिकोण और विकसित हो रही ऊर्जा प्रोफ़ाइल को दर्शाता है। इसमें घरेलू ऊर्जा उत्पादन में त्वरित निवेश शामिल है। साथ ही, वैश्विक ऊर्जा बाजारों में एक जिम्मेदार, विश्वसनीय और दूरदर्शी भूमिका निभाने की उसकी प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।" मंत्रालय ने बताया कि उसने यह निर्णय UAE की उत्पादन नीति, उसकी वर्तमान और भविष्य की क्षमता की व्यापक समीक्षा के बाद लिया है।
संगठन
संगठन में 1967 में शामिल हुआ था UAE
OPEC 1960 में इराक के बगदाद में स्थापित हुआ था। अबू धाबी 1967 में इस संगठन में शामिल हुआ था। तब से, देश ने वैश्विक तेल बाजार की स्थिरता का समर्थन करने और उत्पादक देशों के बीच संवाद को मजबूत करने में सक्रिय भूमिका निभाई है। संगठन से निकलने से UAE को तेल उत्पादन से मामले में फायदा मिल सकता है। वह सऊदी और इराक के बाद संगठन का तीसरा बड़ा तेल उत्पादक देश है।
संगठन
क्या है OPEC और OPEC+ संगठन?
OPEC की स्थापना के समय, इसके शुरुआती संस्थापक सदस्य ईरान, इराक, कुवैत, सऊदी अरब और वेनेज़ुएला हैंं। इसका मुख्यालय ऑस्ट्रिया के वियना में है। संगठन का उद्देश्य सदस्य देशों के तेल उत्पादन और निर्यात नीतियों का समन्वय करना, वैश्विक तेल की कीमतों को स्थिर रखना और सदस्य देशों के हितों की रक्षा करना है। OPEC+ 2016 में बना बना था, जो बड़ा संगठन है। इसमें OPEC के सदस्य देशों के अलावा 10 अन्य प्रमुख तेल उत्पादक देश भी शामिल हैं।
खिलाफ
अमेरिका के खिलाफ हुई थी संगठन की स्थापना
अमेरिका कभी OPEC का सदस्य नहीं रहा, लेकिन शेल ऑयल की वजह से वह सबसे बड़ा तेल उत्पादक है। 1960 में अमेरिकी तेल कंपनियों के वर्चस्व को खत्म करने के लिए OPEC बना था। यह अमेरिकी शेल ऑयल के बढ़ते उत्पादन से गिरती तेल कीमतों को नियंत्रित करता है और वैश्विक तेल बाजार में मांग-आपूर्ति बैलेंस बनाता है। OPEC+ दुनिया का लगभग 40-41 प्रतिशत तेल उत्पादन नियंत्रित करता है। अब तक एंगोला, कतर, इंडोनेशिया और इक्वाडोर संगठन छोड़ चुके हैं।