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साउथ ब्लॉक से कितना अलग है नया प्रधानमंत्री कार्यालय 'सेवा तीर्थ'?
प्रधानमंत्री कार्यालय का पता 78 साल बाद बदल गया है

साउथ ब्लॉक से कितना अलग है नया प्रधानमंत्री कार्यालय 'सेवा तीर्थ'?

लेखन आबिद खान
Feb 13, 2026
05:26 pm

क्या है खबर?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) 'सेवा तीर्थ' का उद्घाटन कर दिया है। इस परिसर में PMO के अलावा कैबिनेट सचिवालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय भी हैं। इसी के साथ आजादी के बाद पहली बार PMO का पता बदल गया है। इससे पहले सालों तक PMO रायसीना हिल स्थित साउथ ब्लॉक में था। ये नया परिसर सेंट्रल विस्टा परियोजना का हिस्सा है। आइए 'सेवा तीर्थ' के बारे में जानते हैं।

सेवा तीर्थ

कैसा है 'सेवा तीर्थ'?

'सेवा तीर्थ' करीब 2.26 लाख वर्ग फुट में फैला हुआ है, जिसके निर्माण पर 1,189 करोड़ रुपये की लागत आई है। इसके परिसर में 3 मुख्य इमारतें हैं- सेवा तीर्थ-1, सेवा तीर्थ-2 और सेवा तीर्थ-3। 'सेवा तीर्थ-1' प्रधानमंत्री कार्यालय है, 'सेवा तीर्थ-2' में कैबिनेट सचिवालय का नया मुख्यालय है और 'सेवा तीर्थ-3' में राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) के कार्यालय होंगे। 'सेवा तीर्थ-2' में शिफ्टिंग का काम पहले ही पूरा हो चुका है।

अंतर

साउथ ब्लॉक से कितना अलग है सेवा तीर्थ?

'सेवा तीर्थ' को पहले एक्जीक्यूटिव एन्क्लेव कहा जाता था। लाल और पीले बलुआ पत्थरों से बनी इस इमारत की डिजाइन खुली रखी गई है, जो औपनिवेशिक शासन काल से बाहर निकलने का संकेत भी है। यह इमारत आधुनिक डिजाइन को भारतीय सभ्यता के तत्वों के साथ जोड़ती है, जबकि साउथ ब्लॉक की बलुआ पत्थर की दीवारें औपनिवेशिक वास्तुकला की छाप दर्शाती हैं। इसमें सभी आधुनिक सुविधाओं को भी शामिल किया गया है।

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पारदर्शिता

डिजाइन में पारदर्शिता का तत्व भी शामिल

फिलहाल के साउथ ब्लॉक में बंद कमरों के पीछे सीमित पहुंच और व्यवस्थित आवाजाही में अहम फैसले लिए जाते हैं। 'सेवा तीर्थ' को इस मॉडल से उलट ओपन फ्लोर जैसा बनाया गया है। इसका उद्देश्य औपचारिकताओं को कम करना, अधिकारियों के बीच तालमेल बढ़ाना और आपसी पारदर्शिता की भावना को विकसित करना है। इसकी डिजाइन में भी साउथ ब्लॉक के औपनिवेशिक वास्तुकला को हटाकर भारतीय तत्वों को शामिल किया गया है।

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इंडिया हाउस

परिसर में खास 'इंडिया हाउस'. 5,000 साल पुरानी सभ्यता की झलक

'सेवा तीर्थ' में एक आधुनिक सम्मेलन स्थल 'इंडिया हाउस' है, जहां उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठकें, अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन और प्रेस वार्ता आयोजित करने के लिए डिजाइन किया गया है। साउथ ब्लॉक में ऐसी कोई खास जगह नहीं थी, जिसके चलते परेशानियों का सामना करना पड़ता था। प्रधानमंत्री का निजी कक्ष और सेरोमोनियल रूम्स भव्य बनाए गए हैं। इनका इस्तेमाल विदेशी राष्ट्राध्यक्षों और अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों से बैठकों के लिए होगा। इनकी सजावट में 5,000 साल पुरानी सभ्यता की झलक दिखाई देती है।

अहमियत

क्यों अहम है सेवा तीर्थ?

साउथ ब्लॉक में बंद दरवाजों के पीछे सत्ता से जुड़े अहम फैसले लिए जाते थे। इसके उलट सेवा तीर्थ में अधिकारी साझा स्थान पर काम करेंगे, जिनका उद्देश्य सहयोग को बढ़ावा देना और समन्वय में सुधार करना है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने कहा, "यह भारत की प्रशासनिक शासन संरचना में एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी मील का पत्थर है और आधुनिक, कुशल, सुलभ और नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली के निर्माण के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।"

सुविधाएं

भूकंप रोधी है भवन की डिजाइन, ये आधुनिक सुविधाएं शामिल

'सेवा तीर्थ' को एन्क्रिप्टेड संचार प्रणालियों, उन्नत साइबर सुरक्षा नेटवर्क और एकीकृत सुरक्षा वास्तुकला के लैस किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह इमारत भूकंप प्रतिरोधी है और सभी परिस्थितियों में चालू रहने के लिए डिजाइन की गई है। इमारतों में डिजिटल रूप से एकीकृत कार्यालय, नागरिकों के लिए पब्लिक इंटरफेस जोन, स्मार्ट एक्सेस कंट्रोल, आधुनिक निगरानी प्रणाली, उन्नत आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र, नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण और कचरा प्रबंधन जैसी पर्यावरण अनुकूल व्यवस्थाएं हैं।

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