#NewsBytesExplainer: 20 से ज्यादा देशों में महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल, भारत में कब बढ़ सकती हैं कीमतें?
क्या है खबर?
ईरान युद्ध के चलते वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बुरा असर पड़ा है। ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया है, जिसके चलते कच्चे तेल की कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गई है। इस वजह से अमेरिका समेत 20 से ज्यादा देशों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ गई हैं। हालांकि, भारत में अभी तक कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ा है। समझते हैं सरकार कब तक बढ़ोतरी करने से बच सकती है।
कच्चा तेल
45 डॉलर प्रति बैरल तक बढ़ी कच्चे तेल की कीमतें
अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमला करने के बाद कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल से ज्यादा हो गई है। युद्ध के पहले ये 50 से लेकर 60 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। कच्चे तेल की आपूर्ति रुकने की वजह से ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट के दाम बीते दिन 6 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर 115 डॉलर प्रति बैरल के पार हो गए थे। वहीं, इंडियन बास्केट की कीमतें 156 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।
भारत
भारत पर असर पड़ना तय
भारत अपनी जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। इसका एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। भारत तेल आयात में विविधता ला रहा है, लेकिन अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद रहा, तो असर पड़ना तय है। विश्लेषकों का मानना है कि अगर कच्चा तेल 10 से 20 डॉलर प्रति बैरल बढ़ता है, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 5 से 15 रुपये प्रति लीटर तक की बढ़ोतरी हो सकती है।
गैस
महंगा हुआ रसोई गैस सिलेंडर
सरकार ने 7 मार्च को लिक्विड पेट्रोलियम गैस (LPG) की कीमतें बढ़ाई थीं। घरेलू उपभोक्ताओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 14.2 किलोग्राम के सिलेंडरों की कीमत 60 रुपये और 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक सिलेंडर की कीमतों में 115 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी। सरकार ने प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मिलने वाली सब्सिडी को 300 रुपये प्रति घरेलू सिलेंडर पर बनाए रखा है, जो साल में 12 रिफिल तक के लिए लागू है।
असर
कच्चे तेल की कीमतों का पेट्रोल-डीजल पर क्या होता है असर?
एलारा सिक्योरिटीज की स्टडी के मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में अगर 10 डॉलर प्रति बैरल की बढ़ोतरी होती है, तो ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMC) को पेट्रोल-डीजल के मार्जिन में 6.3 रुपये प्रति लीटर की कमी आती है। LPG के लिए यह 10.2 रुपये प्रति किलोग्राम है। स्टडी के मुताबिक, अगर खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होती है, तो 100 डॉलर प्रति बैरल कच्चे तेल पर OMC की कमाई में 90 से 190 प्रतिशत तक गिरावट आ सकती है।
कीमत
भारत में कब महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल?
जानकारों का मानना है कि सरकार एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों को कच्चे तेल की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल होने तक सुरक्षित रख सकती है। हालांकि, ये अनिश्चिकाल के लिए नहीं हो सकता। सरकार पेट्रोल पर 19.9 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 15.8 रुपये प्रति लीटर एक्साइज ड्यूटी वसूलती है। अभी तक सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कोई कटौती नहीं की है और OMC ही इसका खर्च उठा रही हैं।
देश
अमेरिका में 20 प्रतिशत महंगा हुआ पेट्रोल-डीजल
अमेरिका में पेट्रोल की कीमतों में औसतन 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। 10 मार्च को चीन ने भी ईंधन की कीमतों में मार्च, 2022 के बाद से सबसे बड़ी बढ़ोतरी की है। वहां पेट्रोल-डीजल की कीमतें 3.7 प्रतिशत बढ़ गई हैं। ब्रिटेन में ईंधन की कीमतें 18 महीने के उच्चतम स्तर पर हैं। पाकिस्तान ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 20 प्रतिशत तक, जबकि आर्थिक संकट से उबर रहे श्रीलंका ने भी 8 प्रतिशत की बढ़ोतरी की है।