
बौद्ध से लेकर बुलेट ट्रेन तक, कैसे रहे हैं भारत और जापान के शताब्दियों पुराने संबंध?
क्या है खबर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 2 दिवसीय जापान दौरे पर हैं। वहां वे 15वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और जापानी प्रधानमंत्री शिगेरु इशिबा के साथ बैठक करेंगे। इस दौरान रक्षा, व्यापार और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग पर चर्चा होगी। भारत-जापान के संबंधों की शुरुआत छठी शताब्दी में हुई थी, जब बौद्ध धर्म भारत से निकलकर जापान पहुंचा था। उसके बाद से दोनों देशों के संबंध हर स्तर पर मजबूत हुए हैं। आइए भारत-जापान संबंधों की कहानी जानते हैं।
शुरुआत
कैसे हुई संबंधों की शुरुआत?
भारत-जापान के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान की शुरुआत छठी शताब्दी से मानी जाती है। तब भारत से जापान का बौद्ध धर्म से परिचय हुआ। 752 ईस्वी में भिक्षु बोधिसेना ने नारा के तोडाजी मंदिर में महान बुद्ध की मूर्ति की प्राण-प्रतिष्ठा की थी। इसके बाद स्वामी विवेकानंद, रवींद्रनाथ टैगोर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस समेत कई हस्तियों का जापान से जुड़ाव रहा। जापानी विदेश मंत्रालय के मुताबिक, "बौद्ध धर्म के माध्यम से भारतीय संस्कृति का जापानी संस्कृति पर गहरा प्रभाव पड़ा।"
राजनयिक संबंध
दूसरे विश्व युद्ध के बाद स्थापित हुए राजनयिक संबंध
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1949 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने टोक्यो के एक चिड़ियाघर को भारतीय हाथी दान किया। जापानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि इससे जापानी लोगों के जीवन में नई रोशनी आई, जो युद्ध में मिली हार से निराश थे। 28 अप्रैल, 1952 को जापान और भारत ने शांति संधि पर हस्ताक्षर कर राजनयिक संबंध स्थापित किए। ये संधि दूसरे विश्व युद्ध के बाद जापान द्वारा की गई पहली शांति संधियों में से एक थी।
दौरे
दोनों देशों के नेताओं के उच्चस्तरीय दौरे
1957 में तत्कालीन जापानी प्रधानमंत्री किशी नोबुसुके ने भारत यात्रा की। प्रधानमंत्री नेहरू और राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद ने 1957 और 1958 में जापान की यात्राएं कीं। 1961 में जापानी प्रधानमंत्री हयातो इकेदा और 1984 में प्रधानमंत्री यासुहिरो नाकासोन भारत आए। इस बीच इंदिरा गांधी, राजीव गांधी और नरसिम्हा राव ने जापान का दौरा किया। 2007 में जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने भारत की संसद में ऐतिहासिक भाषण दिया। 2014 के गणतंत्र दिवस में आबे मुख्य अतिथि थे।
विकास
कैसे विकसित हुए द्विपक्षीय संबंध?
साल 2000 में प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में दोनों देशों के संबंधों को 'वैश्विक साझेदारी' का दर्जा दिया गया। 2006 में मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री रहते हुए इसे 'रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' का दर्जा दिया गया। 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में संबंधों को 'विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी' का दर्जा दिया गया। इसी साल प्रधानमंत्री मोदी ने जापान यात्रा भी की। वे अब तक 8 बार जापान जा चुके हैं।
व्यापार
दोनों देशों में कैसे हैं व्यापारिक संबंध?
वित्त वर्ष 2023-24 के दौरान जापान का भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार 22.85 अरब डॉलर था। इस दौरान जापान से भारत को निर्यात 17.69 अरब डॉलर और आयात 5.15 अरब अमेरिकी डॉलर रहा। फिलहाल जापान के कुल व्यापार में भारत 1.4 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ 18वें स्थान पर है। जबकि, भारत के कुल व्यापार में जापान 2.1 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ 17वें स्थान पर है। जापानी कंपनियों ने भारत में 40 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है।
रक्षा
कैसे विकसित हुए रक्षा संबंध?
2008 में दोनों देशों ने सुरक्षा सहयोग पर संयुक्त घोषणा जारी की। जापान और भारत के बीच सुरक्षा और रक्षा वार्ता के विभिन्न ढांचे भी मौजूद हैं, जिनमें विदेश और रक्षा मंत्रिस्तरीय बैठक, वार्षिक रक्षा मंत्रिस्तरीय वार्ता और तटरक्षक बल-से-तटरक्षक बल वार्ता शामिल हैं। 2015 में भारत और जापान ने रक्षा उपकरण एवं प्रौद्योगिकी सहयोग और गोपनीय सैन्य सूचना की सुरक्षा पर 2 महत्वपूर्ण समझौते किए। 2017 में भारत और जापान ने एक्ट ईस्ट फोरम की स्थापना की।