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AI की मदद से कैसे पकड़ा गया 70,000 करोड़ रुपये का बिरयानी टैक्स घोटाला?
आयकर विभाग ने देशभर में चल रहे बड़े रेस्टोरेंट टैक्स घोटाले का पर्दाफाश किया है

AI की मदद से कैसे पकड़ा गया 70,000 करोड़ रुपये का बिरयानी टैक्स घोटाला?

लेखन आबिद खान
Feb 20, 2026
03:45 pm

क्या है खबर?

हैदराबाद में एक बिरयानी रेस्टोरेंट पर आयकर विभाग के छापे ने 70,000 करोड़ रुपये के बड़े टैक्स घोटाले का पर्दाफाश का किया है। जांच के दौरान पता चला कि रेस्टोरेंट पैसे तो कमा रहे थे, लेकिन टैक्स बचाने के लिए कमाई कम दिखा रहे थे। रेस्टोरेंट बिलिंग प्रणाली में गड़बड़ी कर घोटाले को अंजाम दे रहे थे। इस घोटाले को पकड़ने में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस यानी AI ने भी पुलिस की मदद की। आइए पूरा मामला समझते हैं।

शुरुआत

कैसे हुई जांच की शुरुआत?

टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, आयकर विभाग की हैदराबाद इनवेस्टिगेशन यूनिट ने मशहूर बिरयानी चेन रेस्टॉरेंट्स पर जांच की थी। इस दौरान बिलिंग साफ्टवेयर में एक गड़बड़ी सामने आई। शुरुआत में जांच हैदराबाद, विशाखापट्टनम और आसपास के शहरों से हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे इसका दायरा पूरे देश में फैल गया। जांच में पता चला कि वित्त वर्ष 2019-20 से अब तक कम से कम 70,000 करोड़ रुपये का घोटाला हुआ है।

तरीका

घोटाले को कैसे दिया जा रहा था अंजाम?

जांच में सामने आया कि रेस्टोरेंट ग्राहकों से नगद पैसे लेने के बाद बिलिंग साफ्टवेयर से बिल डिलीट कर देते थे। इसका मकसद इनकम टैक्स और GST की लायबिलिटी को कम करना था। कुछ मामलों में ये भी सामने आया कि रेस्टोरेंट ने एक ही बार में बड़ी संख्या में बिल डिलीट किए या कई दिनों के बिल एक साथ हटा दिए। ये नगद लेन-देन पर किया जाता था, चूंकि ऐसे लेन-देन को पकड़ना थोड़ा मुश्किल होता है।

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राज्य

रेस्टोरेंट ने 13,000 करोड़ रुपये के बिल छिपाए

रिपोर्ट के मुताबिक, इस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल करने वाले रेस्टोरेंट्स ने 13,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के बिलों को छुपाया। केवल आंध्र प्रदेश और तेलंगाना में छुपाई गई बिक्री 5,100 करोड़ से ज्यादा की थी। अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से 40 रेस्टोरेंट का दौरा कर वास्तविक बिक्री की तुलना कंप्यूटर रिकॉर्ड से की। केवल इसी जांच में लगभग 400 करोड़ रुपये की छिपाई गई बिक्री का पता चला। सबसे ज्यादा टैक्स चोरी कर्नाटक, तेलंगाना और फिर तमिलनाडु में की गई।

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आंकड़े

घोटाले से जुड़े आंकड़े

60 टेराबाइट डाटा की फोरेंसिक जांच की गई। 2.43 लाख करोड़ बिल जांचे गए। केवल एक साफ्टवेयर से 2.4 लाख करोड़ की कुल बिक्री दर्ज की गई। 13,000 करोड़ रुपये के बिल डिलीट किए गए। 19,400 करोड़ के बिलों में की गई हेराफेरी। 14 प्रतिशत तक बिल डिलीट किए गए या उनमें हेराफेरी की गई। 7 प्रतिशत बिक्री को कम करके दिखाने का अनुमान। कर्नाटक में 2,000, तेलंगाना में 1,500 और तमिलनाडु में 1,200 करोड़ रुपये की गड़बड़ी हुई।

AI

जांच में कैसे हुआ AI का इस्तेमाल?

करोड़ो बिल की जांच में आयकर विभाग ने AI टूल्स और फॉरेंसिक डाटा एनालिटिक्स का इस्तेमाल किया। अधिकारियों ने 60 टेराबाइट्स बिलिंग डाटा की जांच की। ये डाटा एक प्वाइंट ऑफ सेल (POS) सिस्टम से लिए गए, जिसका इस्तेमाल 1.7 लाख रेस्टॉरेंट्स करते हैं। GST नंबर और ऑनलाइन पब्लिक रिकॉर्ड के जरिए रेस्टोरेंट की पहचान मिलाई गई। AI की मदद से सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी को GST नंबरों को रेस्तराओं से जोड़ा गया।

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