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क्या 13 साल से कोमा में हरीश राणा को मिलेगी इच्छामृत्यु? कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसले में कोमा में रह रहे शख्स की इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी है

क्या 13 साल से कोमा में हरीश राणा को मिलेगी इच्छामृत्यु? कोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला

लेखन आबिद खान
Jan 15, 2026
12:26 pm

क्या है खबर?

सुप्रीम कोर्ट में आज 13 साल से कोमा में रह रहे शख्स को इच्छामृत्यु देने के संवेदनशील मामले पर सुनवाई हुई। इस दौरान कोर्ट ने इच्छामृत्यु की अनुमति का संकेत देते हुए कहा कि वो जीवन रक्षक चिकित्सा उपचार बंद करने पर विचार करेगा। दरअसल, गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा पिछले करीब 13 साल से कोमा में हैं। उनके परिजनों ने कोर्ट में यूथेनेशिया (इच्छामृत्यु) की अनुमति को लेकर याचिका दायर की है।

सुनवाई

वकील ने कहा- हरीश पुरानी स्थिति में वापस नहीं आ सकते

सुनवाई के दौरान हरीश के वकील ने कहा, "इस तरह का इलाज जारी रखना गरिमा के साथ जीने के अधिकार का उल्लंघन है।" उन्होंने सुप्रीम कोर्ट की पिछली टिप्पणियों का हवाला दिया, जिसमें कोर्ट ने कोमा में चले गए लोगों के लिए मरने की प्रक्रिया को आसान बनाने की जरूरत पर जोर दिया था। वहीं, एमिकस क्यूरी ने कहा कि मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार हरीश अपनी पुरानी हालत में वापस नहीं आ सकते।

दलील

सुनवाई के दौरान क्या-क्या हुआ?

ASG ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि हरीश की हालत बहुत खराब है और वे केवल हड्डियों का ढांचा बन गए हैं। एमिकस क्यूरी ने मेडिकल बोर्ड के निष्कर्ष का हवाला देते हुए हरीश के लिए जीवन रक्षक उपकरण हटाने की प्रार्थना की। उन्होंने बताया कि हरीश के माता-पिता भी ऐसा ही चाहते हैं। एमिकस क्यूरी ने इच्छामृत्यु की पूरी प्रक्रिया और कोर्ट के पिछले फैसलों और मामलों को भी विस्तार से बताया।

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मामला

हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे हरीश

साल 2013 में हरीश चंडीगढ़ में रहते हुए पढ़ाई के दौरान हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। उनके सिर में गंभीर चोटें आईं और वे कोमा में चले गए। उसके बाद से ही हरीश बिस्तर पर हैं। खाने में वे पाइप के जरिए केवल तरल पदार्थ लेते हैं। माता-पिता ने उनके इलाज के लिए नौकरी छोड़ दी, घर बेच दिया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने बेटे की इच्छामृत्यु के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।

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पिछली याचिका

पहले भी सुप्रीम कोर्ट गए थे हरीश के परिजन

जुलाई, 2024 में हरीश के परिजनों ने दिल्ली हाई कोर्ट में इच्छामृत्यु के लिए याचिका दायर की थी। तब हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि हरीश बिना किसी बाहरी सहायता के स्वयं को जीवित रखने में सक्षम है। इसके बाद परिजनों ने नवंबर, 2024 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। तब तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ ने यह कहते हुए याचिका खारिज कर दी कि हरीश जीवन रक्षक मशीनों पर पूरी तरह से निर्भर नहीं है।

प्लस

न्यूजबाइट्स प्लस

इच्छामृत्यु का मतलब किसी व्यक्ति की मर्जी से मृत्यु देना। ये 2 तरह से दी जाती है- एक्टिव यूथेनेशिया और पैसिव यूथनेशिया। एक्टिव यूथेनेशिया में बीमार व्यक्ति को सीधे जहरीली दवा या इंजेक्शन दिया जाता है। वहीं, पैसिव यूथेनेशिया में बीमार व्यक्ति का इलाज रोक दिया जाता है, जिससे अंतत: उसकी मौत हो जाती है। पैसिव यूथेनेशिया में पहले प्राइमरी और सेकंडरी मेडिकल बोर्ड की अनुमति ली जाती है। रिपोर्टों में विरोधाभास होने पर मामला कोर्ट जाता है।

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