राहत सामग्री, DNA विशेषज्ञ और सुरंग बचाव दल; नेपाल की कैसे मदद कर रहा है भारत?
क्या है खबर?
नेपाल में बाढ़ से 1,200 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है और हजारों लोग लापता हैं। संकट की इस घड़ी में भारत ने पड़ोसी धर्म निभाते हुए नेपाल को सबसे पहले मदद भेजी है। भारत ने राहत सामग्री के साथ-साथ शवों की पहचान करने के लिए DNA विशेषज्ञ और सुरंग में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने के लिए भी खास बचाव दल भेजा है। आइए जानते हैं भारत कैसे नेपाल की मदद कर रहा है।
राहत सामग्री
कई टन राहत सामग्री नेपाल भेज चुका भारत
26 अगस्त को आई बाढ़ के तुरंत बाद भारत ने राहत कार्य शुरू कर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसी दिन नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से बात की और उन्हें हर संभव मानवीय सहायता का आश्वासन दिया।
इसके फौरन बाद वायुसेना के विमान से राहत सामग्री की पहली खेप नेपाल भेजी गई।
बीते दिन यानी 2 सितंबर को वायु सेना के 5वा विमान नेपाल रवाना हुआ। इसमें 11 सदस्यीय विशेष बचाव दल और 5.5 टन दवाएं थीं।
सुरंग दल
भारत ने भेजा विशेष सुरंग बचाव दल
बाढ़ के बाद नेपाल की जलविद्युत परियोजनाओं से जुड़ी सुरंगों को खासा नुकसान पहुंचा, जिनमें सैकड़ों मजदूर फंस गए हैं।
भारत ने इन्हें बाहर निकालने के लिए विशेष सुरंग बचाव दल भेजा है। इसने चिलिमे तक सफर का समय कम करने के लिए अपना बेस त्रिशुली से स्याब्रुबेसी कर लिया है।
2 सितंबर तक, दल सुरंग में लगभग 100 मीटर आगे बढ़ चुका था। टीम सुरंग तक पहुंचने के लिए अस्थायी सड़क मार्ग पर भी विचार कर रही हैं।
DNA
मृतकों की पहचान में जुटे DNA विशेषज्ञ
बाढ़ के बाद सैकड़ों शव ऐसे हैं, जिनकी अभी तक पहचान नहीं हो पाई है। इस काम में मदद के लिए भारत ने 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम भेजी है।
टीम ने नेपाली फोरेंसिक विशेषज्ञों के साथ काठमांडू में DNA विश्लेषण शुरू किया है। पहचान प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए टीम नेपाल की फोरेंसिक सुविधाओं सहित 2 प्रयोगशालाओं में काम कर रही है।
फिलहाल DNA सैंपल लेने के बाद शवों की बिगड़ती स्थिति देख उन्हें दफनाया जा रहा है।
पुल
भारत ने बेली पुल भी भेजे
बाढ़ ने सैकड़ों बुनियादी ढांचों को भी नष्ट कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि कम से कम 35 मोटर योग्य पुल, 45 सस्पेंशन पुल और लगभग 40 किलोमीटर पक्की सड़कें प्रभावित हुई हैं।
भारत ने पुल निर्माण के लिए उपकरण भेजे हैं। नेपाल को भेजी गई सामग्री में 230 फुट लंबे एक लेन वाले मॉड्यूलर स्टील पुल के हिस्से और उन्हें ले जाने वाले ट्रक शामिल हैं।
नेपाल ने दर्जनों बेली पुलों के निर्माण में मदद भी मांगी है।
स्कूल
बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुए ऐतिहासिक स्कूल को भी बनवाएगा भारत
भारत ने नुवाकोट के बिदुर स्थित त्रिभुवन त्रिशुली माध्यमिक विद्यालय के पुनर्निर्माण में मदद का भी वादा किया है। भारत-नेपाल संबंधों में इस स्कूल का खास महत्व है। इसका प्रारंभिक इतिहास भारतीय विकास सहायता से जुड़ा है, जबकि नई इमारत का निर्माण भारत के सामुदायिक विकास कार्यक्रम के तहत किया गया था।
बाढ़ के दौरान इस स्कूल के प्रधानाध्यापक राजेंद्र दवाड़ी ने 1,600 से ज्यादा छात्रों की जान बचाई थी।