Loading...
नेपाल बाढ़ के बीच हीरो बने स्कूल प्रिंसिपल, सूझबूझ से बचाई 1,600 बच्चों की जान
राजेंद्र दवाड़ी और पीछे उनका स्कूल जो अब पूरी तरह तहस-नहस हो चुका है

नेपाल बाढ़ के बीच हीरो बने स्कूल प्रिंसिपल, सूझबूझ से बचाई 1,600 बच्चों की जान

लेखन आबिद खान
Aug 30, 2026
12:35 pm

क्या है खबर?

नेपाल में भयावह बाढ़ ने 700 से ज्यादा लोगों की जान ले ली है। इस बीच त्रिशुली घाटी में स्थित त्रिभुवन त्रिशुली माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेंद्र दवाड़ी देवदूत बनकर सामने आए हैं। उन्होंने अपनी सूझबूझ से 1,643 बच्चों की जान बचाई है। उनकी कहानी सामने आने के बाद लोग उन्हें हीरो कहकर पुकारने लगे हैं। जिस स्कूल में राजेंद्र पढ़ाते थे, मलबे की चपेट में आकर वो पूरा बह गया है।

बाढ़

राजेंद्र को दोस्त ने दी बाढ़ की चेतावनी

रोज की तरह 26 अगस्त को राजेंद्र अपने स्कूल पहुंच चुके थे। पहली पारी के करीब 900 बच्चे स्कूल में थे और 700 बस या पैदल स्कूल आ रहे थे।

तभी सुबह 9:20 बजे उनके एक दोस्त ने चेतावनी दी कि उनका गांव तबाह हो गया है और नदी सब बहा ले गई है।

द टाइम्स के मुताबिक, शुरू में राजेंद्र को लगा कि स्कूल को कुछ नहीं होगा, क्योंकि वो नदी से लगभग 60 मीटर ऊपर था।

स्कूल

पानी बढ़ते ही फौरन खाली कराया स्कूल

राजेंद्र ने बताया कि इसके फौरन बाद एक अभिभावक आया और उसने पानी के तेजी से बढ़ने की चेतावनी दी।

इसके बाद राजेंद्र ने कक्षाएं खाली करने को कहा और स्कूल बस चालकों को भी रास्ते से ही लौटने को कहा। हालांकि, एक बस चालक को राजेंद्र सूचना नहीं दे पाए थे और उसकी बस स्कूल के सामने स्थित पुल पर से बह गई।

फिर राजेंद्र ने पैदल ही बच्चों को ऊंची जगहों की ओर ले गए।

ADVERTISEMENT

मौत

स्कूल के एक शिक्षक और चौकीदार की हुई मौत

सामाजिक इतिहास के शिक्षक संतोष परियार नदी किनारे स्थित अपने किराए के कमरे में नाश्ता बनाने के लिए गए थे। वे पानी के तेज बहाव में बह गए। संतोष की कुछ ही दिन पहले स्कूल में नियुक्ति हुई थी। घटना वाले दिन वे स्कूल शुरू होने से पहले एक्स्ट्रा क्लास लेने के लिए जल्दी आए थे।

वहीं, स्कूल के चौकीदार सुल्तान लामा भी दरवाजे बंद करने के लिए वापस लौटे थे। वे भी बाढ़ में बह गए।

ADVERTISEMENT

बयान

राजेंद्र बोले- इसके अलावा क्या ही कर सकता था

स्थानीय लोगों ने राजेंद्र को बच्चों की जान बचाने के लिए हीरो कहा। हालांकि, उन्होंने कहा, "मैं और क्या कर सकता था? हम स्कूल से निकले और पहाड़ी की ओर गए। वहां जो कुछ भी मिला, उसी के सहारे हमने दिन बिताया। हम लगभग फंस ही गए थे। अब हमको सुरक्षित निकाल लिया गया है।"

बाढ़ में राजेंद्र का 3 मंजिला स्कूल पूरी तरह बह गया। अब स्कूल की इमारत खंडहर बन चुकी है और उसमें कीचड़ भरा हुआ है।

ADVERTISEMENT