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चुनाव आयोग ने SIR में इस्तेमाल हुए सॉफ्टवेयर की जानकारी देने से इनकार किया
चुनाव आयोग ने SIR में इस्तेमाल हुए सॉफ्टवेयर की जानकारी देने से मना कर दिया है

चुनाव आयोग ने SIR में इस्तेमाल हुए सॉफ्टवेयर की जानकारी देने से इनकार किया

लेखन आबिद खान
Oct 25, 2026
09:51 am

क्या है खबर?

चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूचियों में गलतियों और अनियमितताओं की पहचान करने के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर की जानकारी देने से इनकार कर दिया है। आयोग ने एक RTI के जवाब में कहा कि इस तरह की जानकारी व्यावसायिक गोपनीयता और बौद्धिक संपदा से जुड़ी हुई है और सूचना के अधिकार (RTI) अधिनियम के दायरे में नहीं आती है।

रिपोर्ट

आयोग बोला- कोई नया सॉफ्टवेयर नहीं खरीदा गया

हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक, आयोग ने कहा, "SIR प्रक्रिया के लिए कोई नया सॉफ्टवेयर विकसित या खरीदा नहीं गया है। चुनावी पंजीकरण अधिकारी (ERO) किसी मतदाता को शामिल करने या बाहर करने का निर्णय तथ्यों और अभिलेखों के आधार पर करते हैं। संबंधित निर्वाचन क्षेत्र का ERO उस निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची तैयार करने और उसमें संशोधन करने के लिए जिम्मेदार वैधानिक प्राधिकरण है।"

यह RTI तेलंगाना के रहने वाले सामाजिक कार्यकर्ता एमए मुजीब अय्यूब ने दायर की थी।

RTI

RTI में क्या जानकारी मांगी गई थी?

अय्यूब ने मतदाताओं की जानकारी में त्रुटियों या विसंगतियों का पता लगाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले सॉफ्टवेयर, एप्लिकेशन या AI प्लेटफॉर्म का नाम और संस्करण मांगा।

उन्होंने पूछा कि क्या ऐसी प्रणाली सत्यापन, सुधार या विलोपन के लिए रिकॉर्ड को स्वचालित रूप से चिह्नित करती है और इसके बाद क्या किसी भी चरण में AI, मशीन लर्निंग, प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स या स्वचालित निर्णय समर्थन उपकरणों का उपयोग किया गया था।

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जवाब

आयोग ने जानकारी न देने के पीछे क्या तर्क दिए?

आयोग ने जवाब में RTI अधिनियम की धारा 8(1)(D) का हवाला दिया, जो वाणिज्यिक गोपनीयता, व्यापार रहस्यों या बौद्धिक संपदा से संबंधित जानकारी को छूट देता है।

AI के इस्तेमाल और गलत तरीके से नाम छूटने के खिलाफ सुरक्षा उपायों से संबंधित प्रश्नों के बारे में आयोग ने कहा कि मांगी गई जानकारी एक स्पष्टीकरण थी जो अधिनियम की धारा 2(F) के तहत 'सूचना' की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आती है।

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SIR

SIR को लेकर विवादों में आयोग

SIR को लेकर चुनाव आयोग पहले से ही विवादों में घिरा है। अब तक कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में हुए SIR में करीब 13 करोड़ लोगों के नाम डिलीट कर दिए गए हैं।

इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि 2 चुनाव आयुक्तों ने SIR और आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर 14 बार आपत्ति जताई थी।

इस रिपोर्ट के बाद विपक्ष मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

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