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सोनम वांगचुक को पुलिस ने जंतर-मंतर से हटाया, अस्पताल लेकर गई
अनशन पर बैठे सोनम वांगचुक को पुलिस अस्पताल लेकर गई

सोनम वांगचुक को पुलिस ने जंतर-मंतर से हटाया, अस्पताल लेकर गई

लेखन आबिद खान
Jul 18, 2026
09:15 am

क्या है खबर?

21 दिन से दिल्ली के जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को पुलिस ने जबरन वहां से हटा दिया है। भारी सुरक्षा के बीच पुलिस वांगचुक को सफदरजंग अस्पताल लेकर गई है। दिल्ली पुलिस ने कहा कि हाई कोर्ट के आदेशों और चिकित्सकीय विशेषज्ञों की सलाह के बाद वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें जरूरी देखभाल के लिए अस्पताल में शिफ्ट किया गया है।

पुलिस

पुलिस बोली- प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर खाली करें

दिल्ली पुलिस ने कहा, 'माननीय हाई कोर्ट के आदेशों और मेडिकल विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार, वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें जरूरी मेडिकल देखभाल के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे अफरा-तफरी मची। हालांकि, पुलिस ने संयम बरता और पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से किया। हम जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारियों से अपील करते हैं कि वे जल्द से जल्द शांतिपूर्ण ढंग से जगह खाली करदें।'

ट्विटर पोस्ट

सोनम वांगचुक को अस्पताल ले गई पुलिस

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बयान

अभिजीत दिपके बोले- पुलिस ने वांगचुक को गालियां दीं

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा, "सुबह करीब 7 बजे जब मैं बाहर गया था, तभी पुलिसकर्मी वहां पहुंचे। वे सोनम सर को गालियां देते हुए जबरन से ले गए। एक 60 साल के शख्स जो पिछले 20 दिनों से भूख हड़ताल पर थे और जिन्होंने कुछ भी नहीं खाया था, उन्हें दिल्ली पुलिस जबरन उठाकर ले गई। पुलिस ने मेरे साथ भी मारपीट की। ये पुलिसकर्मी नहीं हैं, बल्कि RSS के गुंडे हैं।"

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हड़ताल

वांगचुक की भूख हड़ताल का आज 21वां दिन, 9 किलोग्राम वजन घटा

NEET पेपर लीक में जवाबदेही और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वांगचुक ने 28 जून को भूख हड़ताल शुरू की थी। इस वजह से अब तक उनका 9.5 किलोग्राम वजन कम हो गया है।

उनके साथ AISA की नेहा, आमीन और मनीष भी भूख हड़ताल पर हैं। आमीन को पानी की कमी हो गई है। नेहा का ब्लड शुगर और मनीष का वजन कम हो गया है।

प्रतिक्रिया

विपक्षी नेताओं की प्रतिक्रिया सामने आई

मैनपुरी से सांसद डिंपल यादव ने कहा कि वांगचुक को जबरन हटाना लोकतंत्र और संविधान को कुचलना है।

शिवसेना (UBT)के आदित्य ठाकरे ने कहा, 'दुनिया देख रही है कि भारत में लोकतंत्र को किस तरह बेशर्मी से जबरदस्ती तोड़ा जा रहा है। एक अयोग्य मंत्री के खिलाफ शांतिपूर्ण विरोध-प्रदर्शन भी बर्दाश्त नहीं किए जाते।'

AAP नेता संजय सिंह बोले, "वांगचुक जिंदगी दांव पर लगाकर हड़ताल पर बैठे थे। प्रधानमंत्री ने उनसे बात नहीं की। कोई प्रतिनिधि बात करने नहीं गया।"

हाई कोर्ट

हाई कोर्ट ने कहा था- हर जीवन कीमती

16 जुलाई को वांगचुक को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में सुनवाई हुई थी। तब कोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश दिया था कि वे वांगचुक के स्वास्थ्य और चिकित्सा स्थिति की दैनिक आधार पर सरकारी डॉक्टरों द्वारा निगरानी करें।

कोर्ट ने कहा था, "हम केवल यह देखते हैं कि हर नागरिक का जीवन अनमोल है, सरकार को इसे बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करना चाहिए। यदि किसी प्रकार की चिकित्सा सहायता की आवश्यकता हो, तो तुरंत हस्तक्षेप करें।"

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