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दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग से इनकार किया, बोली- भीड़ हिंसक हुई थी
दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल प्रयोग से इनकार किया है

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग से इनकार किया, बोली- भीड़ हिंसक हुई थी

लेखन आबिद खान
Aug 18, 2026
11:59 am

क्या है खबर?

दिल्ली के जंतर मंतर पर हालिया प्रदर्शन के दौरान अत्यधिक बल प्रयोग को लेकर दिल्ली पुलिस की सफाई सामने आई है। पुलिस ने 20 जुलाई को 'संसद चलो मार्च' के दौरान अत्यधिक और अवैध बल प्रयोग के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारी बैरिकेड तोड़कर संसद की ओर बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, जिसके चलते प्रदर्शन हिंसक हो गया। दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को ये जानकारी दी है।

पुलिस

पुलिस ने कहा- 30,000 से ज्यादा थे प्रदर्शनकारी

पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसने 'क्रमबद्ध' कार्रवाई तभी की, जब भीड़ शांतिपूर्ण नहीं रही और कुछ लोगों ने कई बैरिकेड्स तोड़कर संसद की ओर बढ़ने को कोशिश की।

सुप्रीम कोर्ट में दायर जवाबी हलफनामे में पुलिस ने कहा कि लगभग 3 किलोमीटर में 30,000 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए 5,000 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया था।

पुलिस ने बताया कि झड़प में 240 पुलिसकर्मी और अन्य कर्मी और लगभग 200 प्रदर्शनकारी/नागरिक घायल हुए।

बयान

पुलिस बोली- संसद मार्च के लिए अनुमति नहीं थी

हलफनामे में पुलिस ने कहा कि विरोध प्रदर्शन की परिस्थितियों का आकलन भीड़ के आकार और संरचना के आधार पर किया जाना चाहिए। साथ ही ये भी आरोप लगाए गए कि भीड़ में आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति और असामाजिक तत्व घुस गए थे।

पुलिस ने यह भी कहा है कि संसद मार्च के लिए कोई अनुमति नहीं दी गई थी।

पुलिस ने BNS की धारा 163 का हवाला देकर संसद मार्च को अवैध बताया।

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हलफनामा

पुलिस की जवाबी हलफनामे की बड़ी बातें

बार-बार चेतावनियों और अनुरोधों को नजरअंदाज करते हुए भीड़ ने कई स्तर की बैरिकेडिंग पार की।

कुछ प्रदर्शनकारियों ने पुलिसकर्मियों पर हमला किया और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया।

याचिकाकर्ताओं द्वारा पेश की गईं तस्वीरें, वीडियो और सोशल मीडिया रिपोर्टें स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस के प्रयासों को दर्शाए बिना घटनाओं का केवल एक पक्ष प्रस्तुत करती हैं।

पुलिस की प्रतिक्रिया जरूरी, आनुपातिक और स्थिति बिगड़ने के बाद ही की गई थी।

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कील

कील लगे डंडों के इस्तेमाल पर क्या बोली पुलिस?

पुलिसकर्मियों द्वारा प्रदर्शनकारियों पर कील लगे डंडों का इस्तेमाल किए जाने का भी पुलिस ने खंडन किया है।

पुलिस ने कहा कि वीडियो की जांच से ऐसी वस्तु का केवल एक ही उदाहरण सामने आया है, लेकिन दावा किया गया है कि यह डंडा पुलिस अधिकारी के हाथ में नहीं, बल्कि एक प्रदर्शनकारी के हाथ में था।

पुलिस ने कहा कि वो कील लगा डंडा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय ध्वज वाली एक छड़ी थी।

सादी वर्दी

पुलिस ने बिना वर्दी वाले कर्मियों का भी किया बचाव

पुलिस ने कहा कि प्रदर्शनस्थल पर जो सादे कपड़ों में लाठी लिए पुलिसकर्मियों थे वे स्पेशल ब्रांच, स्पेशल सेल, क्राइम ब्रांच और स्थानीय पुलिस से लिए गए 'स्पॉटर' थे, जो स्थिति की गंभीरता को देखते हुए रणनीतिक रूप से भीड़ में शामिल हो गए थे।

पुलिस ने कहा कि इस तरह के कर्मियों की तैनाती न तो अवैध है और न ही असामान्य है और स्वतंत्रता दिवस गणतंत्र दिवस जैसे सार्वजनिक समारोहों के दौरान इसका इस्तेमाल किया जाता है।

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