
चीन की बौद्ध धर्म को नष्ट करने की कोशिशें कभी नहीं होंगी कामयाब- दलाई लामा
क्या है खबर?
तिब्बती धर्मगुरु दलाई लामा ने एक बार फिर चीन पर तीखा हमला बोला है।
उन्होंने शनिवार को कहा कि चीन बौद्ध धर्म को निशाना बनाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन वह इसमें कभी सफल नहीं हो पाएगा।
दलाई लामा ने बिहार में बोधगया के कालचक्र मैदान में अपने प्रवचन के तीसरे और अंतिम दिन आरोप लगाया कि चीन बौद्ध धर्म को खतरनाक मानता है और इसलिए बौद्ध संस्थाओं को नष्ट कर रहा है।
आरोप
बौद्ध धर्म को खतरे में देखती है चीनी सरकार- दलाई लामा
दलाई लामा ने कहा, "हम बौद्ध धर्म में दृढ़ विश्वास रखते हैं। जब मैं ट्रांस-हिमालयी क्षेत्रों का दौरा करता हूं तो मुझे स्थानीय लोग बौद्ध धर्म के प्रति समर्पित दिखते हैं। यह मंगोलिया और चीन में है, हालांकि चीनी सरकार बौद्ध धर्म को खतरे के रूप में देखती है और इसे नष्ट करने की कोशिश करती है लेकिन वह सफल नहीं हो पाए हैं।"
दलाई लामा ने चीन पर बौद्ध धर्म को नुकसान पहुंचाने का आरोप भी लगाया है।
बयान
"चीन में बौद्ध धर्म को मानने वाले कई लोग मौजूद"
दलाई लामा ने आगे कहा, "आज भी चीन में बौद्ध धर्म को मानने वाले कई लोग हैं। चीनी सरकार ने कई बौद्ध विहारों को नष्ट कर दिया, लेकिन चीन में बौद्ध धर्म के अनुयायियों की संख्या कम नहीं हुई है।"
दलाई लामा ने आगे कहा, "चीन में अभी भी कई बौद्ध मठ मौजूद हैं और वहां के लोगों का बौद्ध धर्म से गहरा संबंध है, लेकिन चीन इस धर्म को नष्ट करने पर तुला हुआ है।"
दौरा
दो साल बाद बोधगया के दौरे पर हैं दलाई लामा
बता दें कि दलाई लामा बोधगया में एक महीने के दौरे पर आए हुए हैं।
कोरोना महामारी के चलते दो साल बाद दलाई लामा का बोधगया का यह पहला दौरा है और वह पिछले सप्ताह यहां पहुंचे थे।
बोधगया के कालचक्र मैदान में 29 दिसंबर से 31 दिसंबर तक तीन दिवसीय प्रवचन का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया था।
इसमें शामिल होने के लिए तिब्बत, भूटान, थाईलैंड, जापान, म्यांमार समेत कई देशों के नागरिक बोधगया पहुंचे थे।
मामला
लामा की जासूसी करने वाली चीनी महिला हो चुकी गिरफ्तार
हाल ही में गया पुलिस ने दलाई लामा की जासूसी करने के आरोप में एक चीनी महिला को हिरासत में लिया था।
इससे पहले पुलिस ने सांग जियालोन नामक एक संदिग्ध चीनी महिला का स्केच जारी कर अलर्ट जारी किया था और बोधगया शहर में उसकी तलाश शुरू की थी।
बता दें कि यह संदिग्ध चीनी महिला पिछले काफी समय से बोधगया समेत देश के अन्य हिस्सों में रह चुकी है।