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क्या खत्म किया जा सकता है आरक्षण, क्या कहता है संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसले?
दिल्ली में 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' के बाद आरक्षण को लेकर बहस छिड़ गई है

क्या खत्म किया जा सकता है आरक्षण, क्या कहता है संविधान और सुप्रीम कोर्ट के फैसले?

लेखन आबिद खान
Aug 23, 2026
05:49 pm

क्या है खबर?

देश में आरक्षण को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। हाल ही में दिल्ली के जंतर मंतर पर 'आरक्षण हटाओ आंदोलन' हुआ, जिसमें मौजूदा आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और इसे आर्थिक आधार पर लागू करने की मांग की गई। इसके बाद इस मुद्दे पर राजनीति भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी (SP) प्रमुख अखिलेश यादव, बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती और कई भाजपा नेताओं के बयान सामने आए हैं। आइए आरक्षण पर संवैधानिक पक्ष जानते हैं।

संविधान

आरक्षण को लेकर संविधान में क्या जिक्र है?

संविधान के कई अनुच्छेदों में आरक्षण का जिक्र है। संविधान आरक्षण को समानता को लागू करने के एक माध्यम के रूप में देखता है।

संविधान का अनुच्छेद 15 सरकार को इन वर्गों के लिए विशेष प्रावधान करने की अनुमति देता है। वहीं, अनुच्छेद 16 में सरकारी नौकरियों में पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।

आरक्षण को लेकर संविधान में कुछ संशोधन भी किए गए हैं।

अनुच्छेद

संविधान के किस अनुच्छेद में क्या है प्रावधान?

अनुच्छेद 15(4): सामाजिक शैक्षणिक वर्गों, SC/ST के लिए विशेष प्रावधान।

अनुच्छेद 15(5): शैक्षणिक संस्थानों में विशेष प्रावधान।

अनुच्छेद 15(6): शिक्षा में सामान्य वर्ग EWS को 10 प्रतिशत आरक्षण।

अनुच्छेद 16(4): सरकारी नौकरियों में पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण।

अनुच्छेद 16(6): सरकारी नौकरियों में सामान्य वर्ग EWS को 10 प्रतिशत आरक्षण।

अनुच्छेद 330/332: लोकसभा और विधानसभा में SC और ST को आरक्षण।

अनुच्छेद 335: सरकारी सेवाओं व पदों पर नियुक्तियों में SC/ST के दावों पर विचार करने का निर्देश।

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कोर्ट

आरक्षण पर कोर्ट का क्या रुख रहा है?

सुप्रीम कोर्ट कई बार कह चुका है कि आरक्षण की समीक्षा करना या उसे पूरी तरह खत्म करना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। हालांकि, कोर्ट ने ये भी माना कि आरक्षण की समीक्षा पूरी तरह असंवैधानिक भी नहीं है।

2022 में जरनैल सिंह बनाम लक्ष्मी नारायण गुप्ता मामले कोर्ट ने कहा था, "कोर्ट पूर्ण रूप से आरक्षण को खत्म करने पर कोई भी विचार व्यक्त करने का इच्छुक नहीं है। यह विधायिका और कार्यपालिका के का विषय है।"

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इंद्र साहनी

सुप्रीम कोर्ट तय कर चुका है आरक्षण की अधिकतम सीमा

आरक्षण की बात हो तो 1992 के इंद्र साहनी मामले का जिक्र जरूर आता है।

तब कोर्ट ने कहा था कि OBC के क्रीमी लेयर को आरक्षण के लाभार्थियों की सूची से बाहर रखा जाना चाहिए, पदोन्नति में आरक्षण नहीं होना चाहिए और कुल आरक्षित कोटा 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं होना चाहिए।

कोर्ट ने OBC के लिए केंद्र सरकार की नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण को सही ठहराया था।

इतिहास

अब आरक्षण का इतिहास जानिए

आरक्षण की उत्पत्ति के लिए जाति व्यवस्था ही जिम्मेदार है। सबसे पहले 1882 में विलियम हंटर और ज्योतिराव फुले ने जाति आधारित आरक्षण का विचार प्रस्तुत किया था।

1933 में ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैमसे मैकडोनाल्ड ने 'सामुदायिक पुरस्कार' पेश किया था। इसमें मुसलमानों, सिखों, भारतीय ईसाइयों, एंग्लो-इंडियन, यूरोपीय लोगों और दलितों के लिए अलग-अलग निर्वाचक मंडलों का प्रावधान किया था।

आजादी के बाद शुरुआत में आरक्षण केवल SC और ST के लिए ही उपलब्ध था।

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